हमले की गूंज से हिली नेपाल सरकार

 
Sep 05, 04:35 pm

काठमांडू। पशुपतिनाथ मंदिर के दो भारतीय पुजारियों पर हुए हमले की गूंज से नेपाल सरकार हिल गई है। भारत की ओर से घटना पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद नेपाल सरकार को खेद तो जताना ही पड़ा है, स्थानीय स्तर पर एक सहयोगी पार्टी ने उसकी मुश्किल बढ़ा दी है। इस मसले पर तराई क्षेत्र के 15 सांसदों ने 22 पार्टियों के सत्ताधारी गठबंधन से समर्थन वापस लेने की धमकी दी है। अगर इस धमकी पर अमल हो गया तो सरकार संकट में आ सकती है।

वैसे, सरकार ने पुजारियों के साथ हुई घटना पर अफसोस जता कर और उन्हें पूरी सुरक्षा देने का वादा कर कूटनीतिक व राजनीतिक स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश की है। इस बीच, शनिवार को दोनों भारतीय पुजारियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की।

15 सदस्यों वाली पार्टी मधेशी जनाधिकार फोरम [लोकतांत्रिक] ने धमकी दी है कि अगर भारतीय पुजारियों पर माओवादियों के हमले जारी रहे तो वह सरकार से बाहर हो जाएगी। इस पार्टी के अध्यक्ष बिजय कुमार गछेदर नेपाल के उप प्रधानमंत्री हैं। उनके अलग होने से माओवादियों के नेतृत्व में बनी सरकार को एक और झटका झेलना पड़ सकता है। इस सरकार के पहले प्रधानमंत्री प्रचंड को केवल आठ महीने में ही पद छोड़ना पड़ा था। तब माधव कुमार नेपाल को प्रधानमंत्री बनाया गया था।

पांच सौ साल पुराने पशुपतिनाथ मंदिर में सदियों से भारतीय पुजारी पूजा-पाठ करते-कराते आ रहे हैं, लेकिन अब माओवादी उन्हें फूटी आंख नहीं देखना चाहते। वे नेपाली लोगों को इस काम पर लगाने के हामी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले दिनों प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने दो भारत [कर्नाटक] के दो पुजारियों की नियुक्ति की थी। शुक्रवार को जब वे पूजा करने जा रहे थे, तो 40-50 माओवादियों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा और उनके कपड़े तक फाड़ दिए। भारत सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया। उसने हमले को उकसाने वाला और आपराधिक कृत्य बताया।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि यह मुद्दा नेपाल सरकार के साथ उठाया गया है और पूरे मामले पर हमारी पूरी नजर है। भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने भी बेंगलूर में कहा कि हम नेपाल सरकार के साथ-साथ पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े ट्रस्ट के संपर्क में भी हैं।

भारत सरकार के कड़े रुख को देखते हुए नेपाल के संस्कृति मंत्री मिनेंद्र रिजाल ने घटना पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा कि गिरीश और राघवेंद्र भंट्ट पर हमला करने वालों में से किसी को नहीं बख्शा जाएगा और न ही किसी को पशुपतिनाथ मंदिर के मामलों में दखल देने दिया जाएगा। उन्होंने दोनों पुजारियों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का भी वादा किया। उन्होंने यह भी बताया कि हमले के सिलसिले में हमलावार समूह के नेता समेत 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि माओवादियों ने पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारियों की नियुक्ति के विरोध में शनिवार को भी कई इलाकों में प्रदर्शन किया।

उधर, शनिवार की सुबह दोनों पुजारी मंदिर में आए और धार्मिक अनुष्ठान के बाद नित्य पूजा-पाठ का काम शुरू किया। इससे पहले कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 4:30 बजे मंदिर खुलने के बाद रिजाल के साथ नेपाल में भारत के राजदूत राकेश सूद ने मंदिर जाकर स्थिति का जायजा लिया। रिजाल पशुपति एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट [पीएडीटी] के अध्यक्ष भी हैं। यह ट्रस्ट पशुपतिनाथ मंदिर के संचालन से जुड़ा है।




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