
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्व समुदाय अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास बनाए रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस क्षेत्र की घटनाओं का सबसे अधिक असर भारत पर पड़ता है और भारत के हितों की दृष्टि से वहां शांति और स्थिरता का बहाल होना महत्वपूर्ण है।
भारत-यूरोपीय संघ के 10वें शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को यहां दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में खराब होते हालात पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने आतंकवाद का सामना करने में आपसी सहयोग बढाने की च्च्छा जाहिर की।
प्रधानमंत्री सिंह ने इस सम्मेलन में यूरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष स्वीडन के स्वीडेन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रेनफेल्ट और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुएल बोरोसो के साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार एवं निवेश समझौते के लिए चल रही बातचीत में कठिनाइयों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि असहमति के मुद्दों के हल कर समझौता वार्ता साल भर में सम्पन्न कर ली जाएगी। शखर बैठक में जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट और अन्य वैश्विक चुनौती पर भी चर्चा हुई।
आतंकवाद को विश्व शांति के लिए 'गंभीर खतरा' बताते हुए भारत और 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ ने इससे निपटने में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसी संदर्भ में सम्मेलन में अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की गई।
सिंह ने रेनफेल्ट और बोरोसो के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'हम इस क्षेत्र में हैं अफगानिस्तान में जो भी होता है..पाकिस्तान में भी होता है इसका विश्व के अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक हमारे ऊपर असर होता है। इसलिए हमारे लिए न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पाकिस्तान की शांति, स्थिरता और प्रगति बहुत आवश्यक है।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात की समीक्षा के मद्देनजर आतंकवाद से मुकाबले के लिए सम्मिलित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अफगानिस्तान में स्थिरता लाने की कोशिश की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, 'हमारी उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान की समस्या को पहचानते हुए इस पक्रिया को कायम रखें..इसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से सुधारात्मक रवैया अपनाने की भी जरूरत है।'