
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने सुरक्षा परिषद में कहा कि नेपाल में शांति प्रक्रिया में गतिरोध बना हुआ है और टकराव तथा हिंसा की आशंका भी है।
यूएन मिशन इन नेपाल [यूएनएमआईएन] की प्रमुख केरिन लैंडग्रेन ने विश्व संस्था के महासचिव बान की मून की नवीनतम रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में पेश करते हुए कहा कि लगातार प्रयासों के बावजूद, बड़े दलों के बीच विश्वास कायम नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में माओवादियों से जुड़ी यंग कम्युनिस्ट लीग और यूनिफाइड माओइस्ट लेनिनिस्ट यूथ फोर्स के बीच कुछ पूर्वी जिलों में टकराव की घटनाएं हुई। केरिन ने कहा कि वर्तमान हालात में, विरोध की इन घटनाओं से टकराव और हिंसा का खतरा बढ़ रहा है। अभी तत्काल आवश्यकता तनाव घटाने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की है।
नेपाल में करीब तीन सदियों से चली आ रही राजशाही की समाप्ति के बाद से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। मई के बाद से राजनीतिक गतिरोध को दूर नहीं किया जा सका है।
केरिन ने कहा कि दुनिया के सबसे युवा गणराज्य नेपाल में सबसे बड़ी चुनौती नया संविधान तैयार करने और हजारों माओवादियों को देश की सेना में शामिल करने की है।
नई रिपोर्ट में कहा गया है कि नेताओं की दिलचस्पी संविधान के मुद्दे पर उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। बान की रिपोर्ट में कहा गया है कि आज की तारीख तक, महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहुत ही मामूली प्रगति हो पाई है।
विचार-विमर्श की प्रक्रिया लगभग थमी हुई है। मेरी राय में वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत से ऐसी प्रक्रिया निकाली जानी चाहिए जिससे शंाति प्रक्रिया को लाभ हो।
मई में नेपाल के राष्ट्रपति रामबरन यादव [नेपाली कांग्रेस] ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ को बहाल किया था जिसके बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने इस्तीफा दे दिया था।
प्रचंड गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने वाली यूनिफाइड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल माओइस्ट [यूसीपीएन एम] से जुड़े हैं।