
नई दिल्ली, जागरण न्यूज नेटवर्क। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई गुरुवार को दोबारा पद की शपथ लेंगे। इस बार उनके सामने काफी कठिन चुनौतियां हैं। पूरे विश्व की निगाह उनके भाषण पर रहेगी। अगस्त में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान उन पर धांधली करने का आरोप लगा। 20 अगस्त को हुए चुनाव में भ्रष्टाचार और फर्जी वोटिंग के आरोप के चलते पश्चिमी देशों के दबाव में वे दूसरे दौर के मतदान के लिए राजी हुए लेकिन उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला के हट जाने से उनका रास्ता साफ हो गया। लेकिन आशंका है कि उन्हें अपने नए मंत्रिमंडल में कुछ करीबी मित्रों की बलि देनी पड़ेगी।
शपथ ग्रहण समारोह की शोभा
शपथ ग्रहण के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों सहित लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के भाग लेने की संभावना है। यह समारोह काबुल के राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न देशों के 30 राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी मंत्रियों के भाग लेने की संभावना है। इनमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड मिलिबैंड, फ्रांस के विदेश मंत्री का आना तय है। अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि के बारे में घोषणा नहीं की है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
तालिबान के हमले की आशंका के मद्देनजर समारोह के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। हवाईअड्डा को आम यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। साथ ही लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से निकलने की हिदायत दी गई है।
शिमला में भी पाई शिक्षा
जन्म : 24 दिसंबर 1957
स्थान : कंधार
भाई-बहन : छह भाई और एक बहन
भाषा : पश्तो, फारसी, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी और फ्रेंच बोलने में माहिर
पत्नी : 1999 में जीनत करजई के साथ विवाह किया। जोपाकिस्तान में अफगान रिफ्यूजी कैंप में डाक्टर हैं। उनका दो साल का एक बेटा मीरवाइज है।
शिक्षा : काबुल में शिक्षा के बाद भारत के शिमला में 1979 से 1983 तक हिमाचल यूनिवर्सिटी से राजनीतिक विज्ञान में पोस्टग्रेजुऐशन किया।
कौन बनेगा उपराष्ट्रपति
करजई के दो पुराने साथी मुहम्मद कासिम फहीम [जिन पर नशीले पदार्थो की तस्करी का आरोप है] और अब्दुल करीम खलीली [युद्ध अपराध में शामिल होने का आरोप] दोनों का उपराष्ट्रपति बनना लगभग तय माना जा रहा है। यह दोनों करजई के पहले कार्यकाल में भी उपराष्ट्रपति थे। हालांकि विदेश मंत्री रंगीन स्पांता और रक्षा मंत्री अब्दुल रहीम को हटाए जाने की संभावना है। यह दोनों मंत्री किसी भ्रष्टाचार मे लिप्त नहीं पाए गए हैं। दरअसल इनका वोट बैंक पर नियंत्रण नहीं है। स्पांता ने कई बार पश्चिमी नीतियों की आलोचना भी की है। अमेरिकी अधिकारी उन्हें अन्य की तुलना में साफ छवि का राजनेता मानते हैं। जबकि रहीम ने पश्चिमी देशों के साथ अपनी अच्छी पैठ बनाई है। इन दोनों के हटने पर अब्दुल्ला अब्दुल्ला द्वारा नामाकित व्यक्ति को उनकी जगह दी जाएगी।
हमला दर हमला
5 सिंतबर 2002: यह हमला कंधार में हुआ
16 सितबर 2004 : उनके हेलीकाप्टर पर राकेट से हमला किया गया
10 जून 2007 : गजनी में हमला हुआ। यहां पर वह एक सभा को संबोधित करने वाले थे। तालिबान ने उनपर 12 राकेट दागे थे
27 अप्रैल 2008 : काबुल में सेना की परेड के दौरान तालिबानियों ने स्वचालित हथियारों से हमला बोला। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि 10 घायल हो गए।