इस्लामाबाद। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा नहीं खोलने की जिद पर अड़े प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने करारा झटका दिया। शीर्ष अदालत ने उन पर अदालत की अवमानना का आरोप तय कर दिया। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ अवमानना का आरोप तय किया गया है। ताजा हालात के मद्देनजर 59 वर्षीय गिलानी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। गिलानी ने हालांकि खुद को बेकसूर बताया है।
भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने के अपने आदेश का पालन नहीं करने को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना माना है। सुनवाई के दौरान सात सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस नसीर-अल-मुल्क ने दो पृष्ठों का आरोप पत्र पढ़ा। जस्टिस ने गिलानी से पूछा कि क्या वह खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानते हैं और उन्हें समझते है? गिलानी ने जवाब दिया, 'हां, मैंने आरोप पत्र पढ़ा है और उसे समझा है।' न्यायाधीश ने फिर गिलानी से पूछा कि क्या वह अपना दोष स्वीकार करते हैं? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'नहीं'।
यदि गिलानी को दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें छह माह की जेल हो सकती है। इसके अलावा वह पांच वर्ष तक किसी भी सरकारी पद पर नहीं रह सकेंगे। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया तो वह खुद ही संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे।
27 फरवरी तक राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मौलवी अनवारुल हक को गिलानी पर अभियोग चलाने का आदेश दिया है। उन्हें जरूरी दस्तावेज जमा कराने के लिए 16 फरवरी तक का समय दिया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई केलिए 22 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। बचाव पक्ष से 27 फरवरी तक सुबूत पेश करने को कहा गया है। इसे अगले दिन रिकॉर्ड किया जाएगा और इसके बाद गिलानी पर मुकदमे की तारीख तय किए जाने की संभावना है। हालांकि प्रारंभिक सुनवाई में प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत पेशी से छूट रहेगी।
खुद कार चलाकर पहुंचे कोर्ट
गिलानी शुक्रवार सुबह अपनी सफेद एसयूवी कार खुद चलाकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनके साथ गृह मंत्री रहमान मलिक और वकीलों का एक दल भी था। शीर्ष अदालत ने पिछले सप्ताह अवमानना मामले में गिलानी को समन भेजने के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी थी। गिलानी इससे पहले 19 जनवरी को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट सरकार पर दबाव बना रही है कि वह जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड में कथित मनी लॉडि्रंग के मामले को फिर से खोले। वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश [एनआरओ] के जरिये करीब आठ हजार लोगों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले खत्म किए गए थे। इसी का लाभ जरदारी और गृह मंत्री मलिक को भी मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में एनआरओ को रद कर राष्ट्रपति समेत सभी लोगों के खिलाफ मामले फिर से खोलने के निर्देश दिए थे।
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