इस्लामाबाद। पाक की विवादास्पद लाल मस्जिद के निकट रविवार शाम हुए आत्मघाती विस्फोट में 19 लोग मारे गए। धमाके में 27 अन्य घायल हो गए।
विस्फोट से ठीक पहले आयोजित सभा में इस्लामी कंट्टरपंथियों ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को सरेआम फांसी देने की मांग की। यह सभा लाल मस्जिद पर पाक सेना की कार्रवाई की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित की गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट लाल मस्जिद के बगल में स्थित बाजार में एक पेट्रोल पंप के नजदीक हुआ। करीब सात बजकर 50 मिनट पर एक व्यक्ति ने खुद को धमाका कर उड़ा लिया। उस समय बड़ी संख्या में सभा में जुटे लोग वापस लौट रहे थे। धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट के जरिये सभा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया था। आंतरिक मामलों में प्रधानमंत्री के सलाहकार रहमान मलिक ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि विस्फोट में आठ लोगों की मौत हुई है जबकि 22 घायल हुए हैं। मगर टीवी चैनलों के अनुसार तीन अस्पतालों में 19 शव ले जाए गए हैं जबकि 27 घायल हुए हैं।
मलिक ने कहा कि यह आत्मघाती हमला था लेकिन उन्होंने सुरक्षा में चूक से इनकार किया।
इससे पहले सभा में धार्मिक नेताओं ने लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज की गिरफ्तारी और मदरसों के सुधार की सरकार की योजना के विरोध में उत्तेजक भाषण दिए। इस्लामी नेता इदरीस हक्कानी ने कहा कि लाल मस्जिद में खून की होली खेलने के जिम्मेदार मुशर्रफ, तत्कालीन आंतरिक मंत्री आफताब शेरपाओ और अन्य लोगों को जनता के सामने फांसी पर लटका देना चाहिए। अल्लाह ओ अकबर जैसे नारों के साथ वहां मौजूद विशाल जनसमूह ने इसका समर्थन किया।
अन्य नेताओं ने कहा कि हत्याओं के लिए जिम्मेदार मुशर्रफ व अन्य पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करना चाहिए। इस कार्रवाई में सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। सभा में भाग लेने के लिए देश भर से हजारों इस्लामी छात्र लाल मस्जिद में एकत्र हुए थे। इसमें सिपह-ए-सहाबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे संगठनों से जुडे़ चरमपंथियों ने भी हिस्सा लिया। अधिकारियों ने बताया कि इस्लामाबाद में इनकी मौजूदगी से कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए चार हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।