भारतीय दूतावास पर हमला, 41 मरे

 
Jul 07, 10:40 am

काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले में चार भारतीय नागरिकों सहित 41 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक वरिष्ठ राजनयिक और एक विशेष रक्षा अधिकारी शामिल हैं। यह किसी भी भारतीय दूतावास पर हुआ पहला बड़ा आतंकी हमला है।

गृह मंत्रालय के निकट स्थित भारतीय दूतावास में विस्फोटकों से लदे टोयोटा कोरोला वाहन को घुसाकर हमलावर ने विस्फोट को अंजाम दिया। परिसर में घुसते वक्त वह दूतावास के दो वाहनों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था। भारतीय राजदूत जयंत प्रसाद ने बताया कि विशेष रक्षा अधिकारी ब्रिगेडियर आरडी मेहता और भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी वेंकटेश्वर राव हमले में शहीद हो गए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राव का शव उड़कर छत पर चला गया। इस विस्फोट में दूतावास की इमारत के बाहरी निर्माण और परिसर के भीतर स्थित भवन को नुकसान पहुंचा है। विस्फोट के बाद अमेरिकानीत गठबंधन सेना ने इलाके को घेर लिया।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नजीब निकजाद ने बताया कि विस्फोट में 41 लोग मारे गए हैं और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं। हमले में मारे गए दो अन्य भारतीयों की पहचान भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान अजय पठानिया और रूप सिंह के रूप में की गई है। भारतीय दूतावास के मारे गए पांचवें कर्मचारी की पहचान नियामतुल्ला के रूप में की गई है। वह स्थानीय अफगान नागरिक है। विस्फोट में तीन भारतीय घायल भी हुए हैं। मरने वाले अन्य लोगों में सात अफगान गार्ड हैं जो मिशन पर तैनात थे।

भारतीय दूतावास पर वीजा के लिए लंबी कतार लगाए लोग, नजदीकी बाजार के दुकानदार और सुरक्षाकर्मी हमले का शिकार बने। अफगान के विदेश मंत्री रंगीन दादफर स्पंटा ने हमले के तुरंत बाद दूतावास का दौरा किया। स्पंटा ने कहा कि शत्रु के इस तरह के हमले भारत और अफगानिस्तान के गहरे संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने हमले के लिए भारत और अफगानिस्तान की गहरी मित्रता के दुश्मनों को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया। एक वक्तव्य में राष्ट्रपति ने कठोर शब्दों में हमले की निंदा की।

भारत ने कहा है कि इस तरह की कायरतापूर्ण कार्रवाई उसे सरकार और अफगानी जनता से किए गए वादों को पूरा करने से नहीं रोक सकेगी। विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत नलिन सूरी की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय दल इस आपात स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए काबुल रवाना हो रहा है। सूरी सचिव हैं। 2001 में अमेरिका नीत नाटो सेना द्वारा तालिबान को सत्ता से बेदखल करने के बाद से अब तक का यह सबसे खतरनाक आतंकवादी हमला है। शक है कि हमले को तालिबान ने अंजाम दिया है हालांकि किसी भी समूह ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। हमले की अमेरिका और पाकिस्तान ने निंदा की है।




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