
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इस रिपोर्ट के बाद सतर्क हो गई है कि तालिबान के स्थानीय प्रमुख बैतुल्ला महसूद ने देश के शीर्ष नेताओं सहित तीन सौ प्रमुख लोगों की सूची बनाई है। ये लोग तालिबान के निशाने पर हैं। सूची में सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, अवामी नेशनल पार्टी, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट जैसी प्रमुख पार्टियों के बड़े नेता और तालिबान विरोधी शिया-सुन्नी मौलवी शामिल हैं। खुफिया एजेंसी के एक करीबी सूत्र ने यह जानकारी दी है।
जानकारी के अनुसार खुफिया और कानून पालन कराने वाली एजेंसियों के लोग, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री और पत्रकारों को भी तहरीक -ए-तालिबान पाकिस्तान निशाना बना सकता है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 27 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के लिए भी इसी संगठन को जिम्मेदार माना जाता है।
डेली टाइम्स अखबार के अनुसार, राजनीतिक नेताओं और विधि व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के परिजनों पर भी खतरा है। सीआईडी प्रमुख साउद मिर्जा ने कहा-हां, इस तरह की सूचना समय-समय पर मिलती रहती है। पाकिस्तान को अब भी धमकी मिल रही है। हम लोग सभी खुफिया एजेंसियों से लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के नेतृत्व को विधि अनुपालन एजेंसी की ओर से तब सावधान किया गया था जब जुनदुल्लाह नाम के आतंकी संगठन के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। तब इस संगठन के लोगों ने लेफ्टिनेंट जनरल अहसान हयात पर हमला किया था। तब इस संगठन के सदस्यों ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के नेताओं को निशाना बनाने की साजिश रचने की बात कबूल की थी क्योंकि वे उनके सदस्यों को अमेरिकी एजेंट मानते हैं।
इस बीच, अशांत उत्तर पश्चिम के मोहमंद एजेंसी पर पूरी तरह से पाकिस्तानी तालिबान का नियंत्रण हो गया है। उसने इस अर्द्ध स्वायत्त क्षेत्र में सक्रिय दूसरे जिहादी संगठनों का दबदबा खत्म कर दिया है। तहरीक -ए तालिबान पाकिस्तान के कमांडर उमर खालिद ने शाह गुट के विरोध खूनी अभियान चला कर मोहमंद पर कब्जा कर लिया। शाह गुट के प्रमुख और उपप्रमुख समेत आठ लोग शुक्रवार की हिंसा में मारे गए थे।