
लाहौर। पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज मुहम्मद सईद को लेकर सरकारी दावों की कलई खोल दी है। अदालत ने कहा है कि पाकिस्तान में जमात-उद-दावा प्रतिबंधित संगठन नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर हाफिज के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दर्ज ताजा मामले खारिज कर दिए।
पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाने के दावे करते रहे हैं। लेकिन, आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जमात पर प्रतिबंध को लेकर सरकार ने अब तक कोई औपचारिक नोटिस नहीं जारी किया है। लाहौर हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सोमवार को अपने फैसले में कहा, 'सईद पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामले दर्ज नहीं हो सकते क्योंकि उनका संगठन मुल्क में प्रतिबंधित नहीं है।' अदालत ने पिछले माल सईद की ओर से दायर एक याचिका पर यह फैसला दिया। सईद ने इस याचिका में फैसलाबाद पुलिस द्वारा उसके खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दर्ज दो एफआईआर को चुनौती दी थी। इन एफआईआर में पाक पुलिस ने मुंबई हमले में वांछित 59 वर्षीय सईद पर लोगों को जिहाद के लिए भड़काने और जमात-उद-दावा के लिए चंदा जुटाने के आरोप लगाए थे।
लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सईद को पिछले साल दिसंबर में भी नजरबंद कर दिया गया था। तब उस पर यह कार्रवाई 26 नवंबर के मुंबई हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जमात-उद-दावा को प्रतिबंधित करने के मद्देनजर की गई थी। लेकिन, लाहौर हाई कोर्ट ने जून में उसे रिहा कर दिया था।
सईद की याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने भी कहा कि जमात-उद-दावा सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठनों की सूची में नहीं है। वकील ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जमात पर प्रतिबंध लगाने के बाद संगठन को सिर्फ सरकार ने अपनी निगरानी सूची में शामिल किया है। सईद के वकील ने भी अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल कानून का पालन करने वाला नागरिक है। वकील ने दावा किया कि न तो सईद और न ही जमात-उद-दावा गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त है। सईद की याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि उसके खिलाफ ये मामले भारत के दबाव के चलते दर्ज किए गए।