
इस्लामाबाद। मुंबई आतंकी हमले की सुनवाई कर रही पाकिस्तान की विशेष अदालत ने भारत में हमले के दौरान गिरफ्तार अजमल अमीर इमान उर्फ अजमल कसाब समेत 14 आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में आतंकवाद निरोधी अदालत ने शनिवार को मुंबई हमले के सिलसिले में पाक में गिरफ्तार सात संदिग्धों के खिलाफ सुनवाई पूरी कर ली। मामले की अगली सुनवाई अब 7 नवंबर को होगी।
कूटनीतिक हलकों में अदालत के इस आदेश का अर्थ यह लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान अब इंटरपोल की मदद से अजमल को हासिल करने की कोशिश कर सकता है। जज मलिक मुहम्मद अकरम अवान ने अजमल के अलावा जिन लोगों को भगोड़ा करार दिया है, उनका ब्यौरा नहीं दिया गया है।
पाकिस्तान में इस मामले में जिन सात लोगों को आतंकवाद निरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है, उनमें लश्कर के आपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के अलावा जरार शाह, अबु अल कामा, हमाद आमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम शामिल हैं। इन पर मुंबई हमले के लिए आतंकियों को प्रशिक्षण देने व हमले के लिए जरूरी संसाधन, आवास, संचार सुविधाएं और वित्तीय मदद मुहैया कराने के आरोप हैं।
लखवी के वकील ख्वाजा सुल्तान ने बताया कि शनिवार की कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने पिछली सुनवाई में उन पर लगाए गए आरोप के तरीके को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और उन्हें खारिज करने की मांग की। 10 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जज बाकिर अली राणा ने संदिग्धों पर उनके वकीलों की गैर मौजूदगी में ही आरोप तय कर दिए थे। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने शनिवार को इस बात पर बहस नहीं होने दी कि वे दोषी हैं या नहीं। उन्होंने जिस तरह से उन पर आरोप लगाए गए उसका पुरजोर विरोध किया।
इसके विरोध में आरोपियों की ओर से हाई कोर्ट में दो याचिकाएं भी दायर की गई हैं। सुल्तान ने कहा कि जज ने अगली सुनवाई में अभियोजन से इन याचिकाओं पर जवाब मांगा है। लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी पीठ ने गत 26 अक्टूबर को आतंकवाद निरोधी अदालत को निर्देश दिया था कि वह आरोपियों का पक्ष सुने और उन पर लगे अभियोग पर आगे बढ़ने से पहले उनकी शिकायतों का निपटारा करे।