वाशिंगटन। पाकिस्तान की अपने शातिर सैन्य अधिकारियों पर पकड़ खत्म हो गई है। ये अधिकारी खुले तौर पर आतंकियों की सहायता कर रहे हैं। यही नहीं ऐसे अधिकारियों को पकड़ने और उन्हें सेना से बाहर निकालने के सारे प्रयास नाकाफी साबित हो चुके हैं। फ्रांस के पूर्व जज ज्यां-लुई ब्रुगिए ने अपनी किताब में यह खुलासा किया है।
ब्रुगिए ने लिखा है, 'पाकिस्तान की स्थिति बहुत भयावह है। केंद्र सरकार का सेना व खुफिया एजेंसी के अवांछित तत्वों पर नियंत्रण खत्म हो गया है।' ब्रुगिए की किताब 'ह्वाट आई कुड नाट से' 2007 में आतंकी करार दिए गए फ्रांसीसी नागरिक विली ब्रिगिट के ब्योरे पर आधारित है।
ब्रुगिए लिखते हैं, 'अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को पाकिस्तानी सेना ने अलकायदा और लश्कर ए तैयबा के आतंकी प्रशिक्षण के शिविरों के बारे कोई जानकारी नहीं दी। लश्कर के ज्यादातर कमांडर सेना में थे, इसलिए जांच का भी कोई नतीजा नहीं निकल सकता था। जांच दल के आने से पहले ही आतंक का प्रशिक्षण ले रहे जिहादियों को हटा दिया गया।'
किताब में पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों की फ्रांस द्वारा की गई जांच का ब्योरा है। किताब में उस मामले का भी जिक्र है जिसमें अधिकारियों ने सेना द्वारा संचालित एक प्रशिक्षण शिविर में सीआईए निरीक्षण दल के आने से पहले आतंकियों को छिपा दिया गया था।
ब्रुगिए ने लिखा है, 'हजारों अफगान और पाकिस्तानी नागरिकों को इन शिविरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों द्वारा ही इन्हें हथियारों की आपूर्ति की जा रही है। पाकिस्तान के मामले में अमेरिका ने कई भूलें की हैं। सुरक्षा बलों को चरमपंथियों से सहानुभूति रखने वालों से मुक्त कराने में शायद काफी देर हो चुकी है। ब्रिगिट को पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी साजिद से निर्देश मिलते थे। साजिद ने ही उसे परमाणु संयंत्र सहित कुछ ठिकानों पर हमले की साजिश रचने वाले एक सेल में शामिल होने के लिए आस्ट्रेलिया भेजा था। 2003 में ब्रिगिट को गिरफ्तार कर लिया गया।
ब्रुगिए की यह किताब सोमवार को बाजार में आ जाएगी। अखबार लास एंजिलिस टाइम्स ने किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं।