“कन्या भ्रूण हत्या” मानव जाति को कलंकित करता यह मसला आज भारतीय समाज की एक घृणित पहचान बन चुका है। गर्भ में पल रही कन्या भ्रूणों को कितनी बेदर्दी के साथ उसकी मां से अलग कर दिया जाता है, उससे जीने का अधिकार छीन लिया जाता है। भारतीय समाज की जड़ों तक जा पहुंचे कन्या भ्रूण हत्या जैसे अमानवीय अपराधों पर भी अब बाजार की नजर पड़ गई है। आमिर खान जैसे स्टार ने अपने पहले टेलीविजन..आगे...
ऐसा नहीं कह सकते कि बाजारवाद हावी नहीं होगा लेकिन ...
बेहतरीन कलाकारों के सशक्त अभिनय की पहचान बन चुका भारतीय सिनेमा आज एक ऐसे मुकाम पर जा पहुंचा है जहां उसे चुनौती दे पाना बहुत मुश्किल है. आज भले ही ग्लैमर और चकाचौंध से भरी सिनेमा की दुनिया में फैशन के बीच अदाकारी कहीं खो सी गई है लेकिन एक समय ऐसा था जब अभिनेत्रियां अपनी सादगी और नजाकत के बल ..आगे...
जब मैं अपने बारे में सोचती हूं कि मेरा भूतकाल कैसा था, किन-किन परेशानियों ने मुझे घेर रखा था, मेरी शरण में आकर कौन-कौन लोग हुए जो मेरे नाम का फायदा उठाते थे तो मेरे सामने कुछ अच्छे व कुछ बेहद बुरे चित्र उपस्थित होते हैं. जब मुझे अपने आप को जनता के सामने सिद्ध करने का मौका मिलता था तो मुझे या तो रद्द कर दिया जाता था या फिर हो-हल्ला..आगे...
पुच्छो ना कैसी हे मेरी माँ किसी सच्चे दोस्त जैसी ...
मां तो बस मां होती है, एक मां के मनोभावों को शब्दों में पिरोना सबसे मुश्किल होता है. यही बात है कि मैं चाहते हुए भी मां के प्यारे से अहसास को शब्दों का आकार नहीं दे पा रहा हूं. मां की अहमियत का अंदाजा एक छोटी सी बात से ही लग सकता है कि हमारा होना या न होना सिर्फ और सिर्फ मां की इच्छा पर ही निर्भर है. उसने चाहा तो हम आज जिंदगी ..आगे...
आपका आलेख पुरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता है किन्तु...