
छपरा आरआरटीटीआईएस यानी रियल रनिंग ट्रैकिंग ट्रेन इन्फारमेशन सिस्टम। हर तीन मिनट पर चलती ट्रेनों की अद्यतन स्थिति को बताने वाली यह महत्वपूर्ण प्रणाली अब छपरा जंक्शन के लिए सपना बन चुकी है। रेलमंत्री लालू प्रसाद द्वारा शुरू की गयी इस प्रणाली से छपरा के अलावा सोनपुर आदि जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण जंक्शन भी लाभान्वित होने वाले थे। पर, ममता बनर्जी के रेलमंत्री बनने के बाद इस सेवा के विस्तार की योजना अधर में चली गयी और देश में सबसे पहले पटना जंक्शन पर शुरू हुई यह प्रणाली यहीं तक रह गयी। 'मैडम' को नाराज नहीं करने की अधिकारियों की मंशा से 'सर' के 'सिस्टम' को अब फुल स्टाप लग गया है।
'सिमरन' प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी कानपुर और आरडीएसओ (रिसर्च डेवलपमेंट स्टैंटर्ड आर्गनाइजेशन) के संयुक्त बैनर तले इस कार्यक्रम की शुरूआत रेलमंत्री लालू प्रसाद ने पटना जंक्शन से की। इस सेवा की खासियत है कि यह हर तीन मिनट पर चलती ट्रेनों की 'पोजिशन' बताता है। इसके लिए चुनिंदा ट्रेनों में जीएसएम युक्त एक चिप लगा होता है। यह चिप आईआईटी कानपुर में लगे मुख्य सर्वर से जुड़ा है और इसे हर तीन मिनट पर सिगनल देता है। इस प्रणाली की एक अन्य बड़ी खासियत यह भी है कि सूचनाएं स्वत: अपडेट होती रहती हैं। सेवा विस्तार के क्रम में इस प्रणाली को छपरा जंक्शन पर भी लगना था। लेकिन इसी बीच रेलमंत्री लालू प्रसाद की कुर्सी चली गयी और नये रेलमंत्री ममता बनर्जी का इस पर ध्यान नहीं जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अब इस प्रणाली का छपरा जंक्शन पर लगना, सपने देखने जैसी बात है। इस प्रणाली के विस्तार में धन का अभाव आड़े आ रहा है और इसके लिए जरूरी राशि रेलवे की मुहैया कराने की मंशा नहीं है। सूत्रों का यह भी मानना है कि यह प्रणाली पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद की सोच थी इसलिए भी रेलमंत्री ममता बनर्जी के अधिकारी इस तरफ आंखें मूंदे बैठे हैं। उन्हें डर है कि अगर इस सेवा का विस्तार किया गया तो इसका श्रेय श्री प्रसाद ले लेंगे और 'मैडम' उनसे नाराज हो जायेंगी। इधर, स्टेशन अधीक्षक डी.के. लाल ने कहा कि उन्हें इस सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं है। डिविजन से जानकारी मिलेगी।