
सुपौल। संपूर्ण जिले में अनंत चतुर्दशी का त्योहार धूमधाम के साथ संपन्न हो गया। गुरुवार को लोगों ने अनंत को अपनी दाहिनी भुजा पर बांधकर भगवान विष्णु को स्मरण किया। बता दें कि अनंत चतुर्दशी को अन्तहीन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की भक्ति का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की कथा भी होती है।
कहते हैं कि एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। यज्ञ मंडप का निर्माण अद्भुत था। यज्ञ मंडप में घूमते हुए दुर्योधन एक तालाब में स्थल के भ्रम में गिर गए। इस दौरान भीमसेन के साथ ही द्रोपदी ने दुर्योधन का उपहास किया। जिससे वह काफी चिढ़ गया। बदला लेने के विचार से ही उसने पांडवों को जुए में पराजित किया। इसी कारण पांडवों को बारह वर्ष के लिए बनवास भी भोगना पड़ा। बताया जाता है कि इसी बनवास काल में युधिष्ठिर ने अनंत चतुर्दशी का व्रत किया और उन्हें दुखों से मुक्ति मिली। एक अन्य कथा के अनुसार, कौण्डिन्य ऋषि ने अनंत को जलाकर अपमान किया। फलस्वरूप वह कंगाल हो गए। पत्नी द्वारा गलती का अहसास कराए जाने पर ऋषि ने पश्चाताप किया। चौदह वर्ष तक विधिपूर्वक व्रत करने पर उन्हें समस्त कलेशों से मुक्ति मिली थी। यही कारण है कि लोग आज भी पूरी श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और इस अवसर पर अनंत बांधते हैं। अनंत बांधकर काफी लोग वैद्यनाथ धाम के लिए के लिए रवाना भी हुए।