
पटना बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए अल्पकालीन योजना तटबंध निर्माण के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। कोसी को किसी समय उत्तर बिहार का शोक कहा जाता था किन्तु तटबंधों के निर्माण के बाद बड़े हिस्से सुरक्षित हैं। इसकी उपयोगिता को देखते हुए बागमती, महानन्दा व चन्दन नदियों पर 1535 किलोमीटर में नए तटबंध निर्माण की योजना है। इससे 25.84 हेक्टेयर भूमि को बाढ़ से सुरक्षित किया जा सकेगा। बागमती पर तो भू-अर्जन कार्य प्रारम्भ है जबकि दो नदियों पर कार्य अगले वित्तीय वर्ष में शुरू होने की संभावना है।
उत्तर बिहार को नेपाल से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से स्थायी तौर पर मुक्ति दिलाने का तो एकमात्र उपाय नेपाल में हाई डैम का निर्माण है, जो दीर्घकालीन योजना है। राज्य में 3450 किलोमीटर निर्मित तटबंधों से 29.16 लाख हेक्टेयर भूमि को बाढ़ से सुरक्षित किया जा सका है जबकि 68.80 लाख हेक्टेएर भूमि में बाढ़ से तबाही होती है। अधिकतर तटबंधों की आयु समाप्त हो गयी है। प्रतिवर्ष तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर जर्जर तटबंधों की मरम्मत से काम चलाया जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने पूर्व निर्मित 593 किलोमीटर तटबंधों के ऊंचीकरण व मजबूतीकरण की बदौलत बाढ़ से बचाव की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। बागमती नदी पर 241.505 किलोमीटर नए तटबंध का निर्माण होगा। इसपर 792 करोड़ व्यय अनुमानित है। सरकार का दावा दो माह में भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी करने की है। बागमती के दायें ढेंग से रून्नीसैदपुर तक 2.05 किलोमीटर तटबंध निर्माण कर भारत-नेपाल सीमा से जोड़ना है। नदी के बायें हिस्से में 128 किलोमीटर व दायें 112.967 किलोमीटर तटबंध निर्माण होगा। तटबंध निर्माण कार्य दो वषरें में पूरा करना है। भागलपुर जिले की चन्दन नदी पर 92.65 किलोमीटर नए तटबंध का निर्माण होगा। इसके साथ ही पूर्व निर्मित 83.19 किलोमीटर का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा। इसपर 147 करोड़ व्यय अनुमानित है। केन्द्र ने इसपर सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। इससे बांका, भागलपुर व मुंगेर जिले को बाढ़ से बचाया जा सकेगा। महानन्दा बेसिन योजना के तहत 2010-11 में कार्य प्रारम्भ होने की संभावना है। इसपर 603 करोड़ से 1196 किलोमीटर में नए तटबंध का निर्माण होगा। इसको नेपाल सीमा से जोड़ना है। तटबंध निर्माण से किशनगंज,कटिहार,अररिया व पूर्णिया का बाढ़ से बचाव होगा।