
किशनगंज। जिले के बहादुरगंज के निवर्तमान थानाध्यक्ष द्वारा 01 अगस्त 2008 को कुर्क की गई सम्पति माननीय उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद माननीय अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी, किशनगंज ने कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त करने का आदेश देते हुए थानाध्यक्ष को न्यायालय में उपस्थित होकर कारण पृच्छा दाखिल करने का निर्देश जारी किया है । इस संदर्भ में कोर्ट ने थानाध्यक्ष पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि न्यायालय के आदेश के प्रति कोई सम्मान नहीं है और कारण पृच्छा दाखिल करने की आदेश का उपेक्षा जानबूझकर की गई है। उल्लेखनीय है कि माननीय अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायलय में परिवाद संख्या 616/2006 अनवरी बेगम बनाम मो. राहिल व अन्य अभियुक्तों की उपस्थिति पर लंबित है। इस वाद में कुल सत्रह अभियुक्त हैं जिनमें से सोलह अभियुक्तों ने जमानत ले ली है। मात्र एक अभियुक्त मो. राहिल की उपस्थिति हेतु दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत कार्रवाई करने का आदेश माननीय अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी दिया गया। कार्यालय ने दिनांक 29.02.08 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के अंतगर्त जारी किया एवं साथ ही अजमानतीय वारंट भी उसी तिथि को जारी किया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के कार्यान्वयन की रिपोर्ट एवं अभियुक्त की संपत्ति की रिपोर्ट बहादुरगंज थाना द्वारा समर्पित की गई। इस विधि विरूद्ध आचरण से अभियुक्त को काफी मानसिक संत्रास झेलना पड़ा । अभियुक्त को माननीय उच्च न्यायालय पटना तक दौड़ लगानी पड़ी और एक रिट दायर करना पड़ा। पुन: माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मामला एसडीजीएम के न्यायालय के निर्देशानुसार मामला लंबित है। माननीय एसडीजीएम ने दिनांक 12 जनवरी 2009 को थानाध्यक्ष बहादुरगंज से कारण पृच्छा पूछा था, किन्तु थानाध्यक्ष न तो न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही कारण पृच्छा ही दाखिल किया। हालांकि माननीय एसडीजेएम 01 अगस्त 2009 को कुर्क की गई अभियुक्त की सम्पत्ति को रिलीज करने का आदेश दिया है।