
बक्सर अस्पताल से गायब रहने वाले डाक्टर और कर्मचारी अब डाटा आपरेटर के सामने आरजु विनती करते नजर आयेंगे। क्योंकि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कम्प्यूटर से हाजिरी बनेगी। अभी तक अनुमंडल मुख्यालय के अस्पताल को छोड़ कुल छह पीएससी में बायो मैट्रिक सिस्टम लगा दिया गया है। जहां अंगुली के निशान से हाजिरी बनेगी। जिले के जिन छह पीएससी में यह तकनीक कार्य करने लगी है। उनमें राजपुर, इटाढ़ी, डुमरांव, नावानगर, ब्रह्मपुर और सिमरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल है। जिला मुख्यालय के चिकित्सक और कर्मचारी अभी तक इससे बचे हुए हैं। क्योंकि यहां डाटा आपरेटर की कमी के नाम से सिस्टम नहीं लगाया गया है। सिविल सर्जन रामचन्द्र प्रसाद ने बताया कि इन केन्द्रों पर नवम्बर माह के प्रारंभ से ही यह तकनीक कार्य करने लगी है। कम्प्यूटर के माध्यम से हाजिरी बनाने की इस प्रणाली में कर्मचारी को अपनी चार अंगुलियों का निशान लगाना होता है। स्वास्थ्य केन्द्र में कार्य करने वाले चिकित्सक के साथ सभी कर्मचारी इसकी जद में हैं। जो लोग जिस अस्पताल में पदस्थापित हैं। उन सभी को दो बार अपनी हाजिरी बनानी होगी। अस्पताल में आगमन के समय और दूसरे वापसी के समय। इस प्रक्रिया से फील्ड में रहने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को अलग रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन सभी सिस्टम को एक साथ इंटर नेट से जोड़ा जाना है। ताकि प्रतिदिन की उपस्थिति का ब्योरा मुख्यालय में स्टोर किया जा सके। लेकिन अभी तक किसी भी अस्पताल के कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा नहीं गया है। ऐसी स्थिति में डाटा आपरेटर की सहायता से इसके रिकार्ड में छेड़छाड़ संभव है। लेकिन अस्पताल के लोग इस बात से इनकार करते हैं। उनके कथनानुसार सारे रिकार्ड कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क में स्टोर हो जायेंगे। जिसका माह के अंत में प्रिंट निकाला जा सकता है। कोई भी सरकारी कर्मचारी बगैर उपस्थित हुए अपनी हाजिरी नहीं बना सकता। क्योंकि उसकी चार अंगुलियों के निशान कम्प्यूटर की स्क्रीन पर लगने के बाद ही स्वत: हाजिरी बननी है।