पटना, जागरण ब्यूरो
बिहार में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने को मजबूर हैं। गरीबी के पैमाने को लेकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच खींच-तान चलती रहती है। केन्द्र सरकार बिहार के लगभग 65 लाख परिवारों को ही गरीबी रेखा के नीचे मानती है। और उसी के अनुसार कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराती है। जबकि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार यह संख्या करीब 1.45 करोड़ है। राज्य सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे के बचे हुए लोगों को अपने बूते 'खाद्य सुरक्षा योजना' के तहत कम कीमत पर अनाज मुहैया कराने का निर्णय किया है। इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इधर राज्य सरकार के ताजा आंकड़े के अनुसार 57.56 फीसदी ग्रामीण परिवार गरीबी रेखा के नीचे बसर करते हैं। इन परिवारों की संख्या 1 करोड़ 26 लाख 56 हजार 105 है। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 31 मार्च को जिलाधिकारियों के नाम जारी ताजा आंकड़े के अनुसार बिहार के 38 में 30 जिले ऐसे हैं जहां 50 फीसदी से ज्यादा परिवार गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं। ये जिले हैं अररिया, अरवल, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गया, गोपालगंज, जमुई, कैमूर, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, वैशाली और बेतिया। 18 जिले ऐसे हैं जहां राज्य के 57.56 फीसदी की तुलना में ज्यादा गरीब परिवार निवास करते हैं। सर्वाधिक गरीबी किशनगंज में है। गरीब ग्रामीण परिवारों में सर्वाधिक 79.08 फीसदी परिवार किशनगंज में रहते हैं। सिवान में गरीबी सर्वाधिक कम है। यहां 43.06 फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं।