
संदीप देव, नई दिल्ली। पाकिस्तान के कराची शहर के आतिफ व उसकी पत्नी अनसूइया की जान अटकी थी। उनके साढ़े तीन माह के बेटे अशरफ की जान खतरे में थी। अशरफ के हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां उल्टी दिशा में थीं और हृदय में तीन सुराख थे। कराची के डाक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए उसे तत्काल दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल ले जाने को कहा। एस्कॉर्ट्स के बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डा. राजेश शर्मा की टीम ने उसका ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दे दी।
इस सफलता के बीच में अशरफ का रक्त समूह एबी निगेटिव एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया, लेकिन एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा एफएम रेडियो पर कराई गई घोषणा व लोगों को भेजे गए एसएमएस से रात में ही कई लोग उसे रक्त देने पहुंच गए, जिससे अशरफ की जान बचाने में मदद मिली।
अशरफ का ऑपरेशन करने वाले डा. राजेश शर्मा के अनुसार बच्चे को ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट ऑर्टरी की बीमारी थी। इसमें उसके खून की धमनियां हृदय के विपरीत दिशा में जुड़ी थीं जिससे ऑक्सीजन रहित नीला खून उसके शरीर में पहुंच रहा था और स्वच्छ लाल खून उसके फेफड़े में जा रहा था, जबकि सामान्य आदमी में इसके विपरीत होता है। उसके हृदय में तीन सुराख भी था। इससे उसकी जान को खतरा था।
डा. राजेश ने बताया कि अशरफ को ऑर्टियल स्विच आपरेशन विद पीए बैंडिंग करना पड़ा। पहले ऑपरेशन से उसकी धमनियों को उचित दिशा में लगाया गया, ताकि लाल रक्त का प्रवाह शरीर में व नीले रक्त का प्रवाह फेफड़े में होना सुनिश्चित हो जाए। बच्चा इतना छोटा है कि उसके हृदय के तीनों सुराख बंद करना उचित नहीं था। इसलिए इसे पल्मनरी ऑर्टरी बैंड लगाकर बंद कर दिया गया। जब अशरफ बड़ा होगा तो एक और ऑपरेशन के जरिये उस बैंड को निकाल कर उसके सभी सुराखों को बंद करना होगा। अशरफ के लिए रक्त जुटाने का प्रयास करने वाली संस्था केयर माई कोलेस्टोमी की सदस्य तूलिका वर्मा ने बताया कि उन्हें जैसे ही अशरफ की स्थिति का पता चला, उन्होंने एसएमएस के जरिये एफएम रेडियो और अपने जानकारों को सूचना भेज दी जिसका असर भी सामने आ गया। अशरफ की मां अनसुइया व पिता आतिफ ने बताया कि विमान कर्मचारियों से लेकर अशरफ का ऑपरेशन करने वाले डाक्टर और उसे खून मुहैया कराने में जिस तरह से भारत के लोगों ने मदद की, वह उनके इंसानियत को दर्शाता है। इनके लिए हम भारतीय बंधुओं का सदा आभारी रहेंगे।