
मनीषा खत्री, नई दिल्ली। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जेडी कपूर ने कहा कि कोई भी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल पैसे जमा नहीं कराने पर किसी भी ऐसे व्यक्ति को भर्ती करने से मना नहीं कर सकता जिसकी जान को खतरा हो। किसी अजनबी से यह भी अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह इलाज के लिए एडवांस में पैसा जमा करवाएगा। यह कहते हुए जस्टिस कपूर ने जयपुर गोल्डन अस्पताल को आदेश दिया है कि वह मृतक के परिजनों को दस हजार रुपये मुआवजा दे।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस कपूर ने कहा कि अस्पताल प्रशासन का यह कहना कि वह राजेंद्र सुरी को इसलिए भर्ती नहीं कर पाया था क्योंकि उसके पास बेड खाली नहीं था, गलत है। असली कारण यह है कि राजेंद्र सूरी को घायल अवस्था में अस्पताल में लाने वाला अजनबी पैसे जमा नहीं करा पाया था। आयोग ने कहा कि एक अजनबी का यह मानवीय व्यवहार था कि वह सड़क पर पड़े एक घायल व्यक्ति को नजदीक के अस्पताल में ले आया। वहीं सेवा की शपथ लेने वाले अस्पताल ने अपनी जिम्मेदारी से सिर्फ इसलिए मुंह मोड़ लिया क्योंकि इलाज शुरू करने से पहले दस हजार रुपये जमा नहीं कराए गए।
जस्टिस कपूर ने कहा कि संविधान के अनुसार जीना हर नागरिक का अधिकार है, इसलिए किसी इंसान की जिंदगी बचाने का खर्च अस्पताल राज्य सरकार से भी ले सकता है। लोगों के जीवन की रक्षा करना सरकार का कर्त्तव्य है।
पेश मामले में यूको बैंक में कार्यरत राजेंद्र सूरी को घायल अवस्था में एक दिसंबर 1998 को एक सुनील नामक अजनबी जयपुर गोल्डन अस्पताल लेकर आया था। फीस जमा नहीं करने पर राजेंद्र को डीडीयू अस्पताल में रेफर कर दिया गया था। उसके बाद उसे आरएमएल भेज दिया गया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।