
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : दिल्ली की निचली अदालतों के विकेंद्रीकरण के फैसले का विरोध करते हुए तीस हजारी कोर्ट स्थित दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्य बृहस्पतिवार को ही दोपहर बाद हड़ताल पर चले गए। बार के सदस्य शुक्रवार को भी हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद वे भविष्य की रणनीति तय करेंगे। वहीं अन्य निचली अदालतों की बार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।
हड़ताल के कारण बृहस्पतिवार को कोर्ट का कामकाज ठप हो गया। इस संदर्भ में दिल्ली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी जिलों के लिए अलग-अलग जिला जज बनाए जाएंगे। इसका बार शुरू से ही विरोध करती रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया जाएगा कि इस मुद्दे को संवैधानिक पीठ को सौंपा दिया जाए। उन्होंने बताया कि वे लोग केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर आग्रह करेंगे कि अध्यादेश जारी कर इस फैसले को रद्द कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आम जनता को कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहने वाला एक आम आदमी यहां के हर हिस्से से जुड़ा है। इसलिए अलग-अलग अदालत बनाने का कोई फायदा नहीं है। इसके पूर्व जब रोहिणी जिला अदालत का उद्घाटन हुआ था उस समय भी इसके विरोध में दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्य लंबे समय तक हड़ताल पर रहे थे।
वहीं नई दिल्ली बार एसोसिएशन की अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद तीस हजारी कोर्ट स्थित सिविल कोर्ट अन्य निचली अदालतों में भेज दी जाएगी। जिससे वहां के वकीलों व मुवक्किलों को फायदा होगा। शाहदरा बार एसोसिएशन के सचिव डी.डी.पांडे ने बताया कि उनकी बार ने भी इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि यमुनापार के लोगों को सिविल मामलों की सुनवाई के लिए दूर जाना पड़ता था।