

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के सभी नेता रविवार को जहां विश्वास मत के मुद्दे पर सांसदों के जोड़-तोड़ में लगे रहे, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी राजधानी के बुजुर्गो के बीच उनका दुख दर्द बांट रहे थे। फिक्की ऑडिटोरियम में रविवार को वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में श्री आडवाणी ने कहा कि भारत की परंपरा में परिवार का अनन्य स्थान है, जो हमें सुसंस्कारित करता है, लेकिन कुछ दिनों से बुजुर्गो की समस्याओं ने परिवार की ताकत को कहीं न कहीं कमजोर किया है।
'कल का मेरे सपनों का भारत' की बात करते हुए श्री आडवाणी ने कहा कि भले ही 18वीं से 20वीं शताब्दी पर अंग्रेजों, यूरोपियों तथा अमेरिका का बोलबाला रहा हो, लेकिन 21वीं सदी भारत का होगा। आजादी के 75वें वर्ष पूरे होने तक हम प्रशिक्षित व शिक्षित मानव बल तैयार करेंगे जो दुनिया के उद्योग से व्यापार जगत का नेतृत्व करेंगे। अंग्रेजों के आने से पहले हमारा व्यापार विश्व व्यापार का 16 फीसदी था, जो आज मात्र 1.6 है। उन्होंने कहा कि हमारा सफल लोकतंत्र हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसे पूरी दुनिया मानती है, लेकिन आज आलम यह है कि आजादी के 61 साल बाद भी हमारा सुराज्य का सपना पूरा नहीं हुआ। हम इसे पूरा करेंगे। इसके लिए उन्होंने सुशासन और ईमानदार नेतृत्व के महत्व को रेखांकित किया।
श्री आडवाणी ने परिवार व्यवस्था को संरक्षित व मजबूत बनाने के लिए परिवार को सर्वश्रेष्ठ कृति बताया। उन्होंने कहा कि सुखी परिवार वह है जहां युवा और बुजुर्ग साथ-साथ रहें और साथ-साथ प्यार बांटे। उन्होंने अपने बारे में कहा, 'मुझे जीवन में पारिवारिक ऊर्जा व वैचारिक सामर्थ्य से ही इतनी खुशी मिली है। इसलिए जरूरी है कि परिवार की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।' उन्होंने कहा कि बुजुर्गो को बस प्यार चाहिए, और उनका हक भी है कि उन्हें प्यार मिले। उन्होंने सार्वजनिक मामलों में बुजुर्गो की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही।
दिल्ली सीनियर सिटीजन फेडरेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन, फेडरेशन के अध्यक्ष चरती लाल गोयल, समेत सैकड़ों बुजुर्ग उपस्थित थे। इस मौके पर आयकर विशेषज्ञ सुभाष लखोटिया ने बुजुर्गो को टैक्स बचाने के नए नुस्खे व वसीयतनामा बनाने के दौरान की बारीकियों से अवगत कराया।