
पवन कुमार, नई दिल्ली
राजधानी में सरकारी वकीलों की कमी तो है ही, उनका काम निपटाने के लिए स्टेनो की संख्या भी काफी कम है। इस कारण सरकारी वकीलों को अपना काम कराने के लिए कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है जिससे इन लोगों का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अदालतों में विचाराधीन मामलों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
इस समय राजधानी क्षेत्र की चारों प्रमुख अदालतों में करीब 141 अभियोजन अधिकारी हैं। जिनमें कड़कड़डूमा कोर्ट में दो मुख्य अभियोजन अधिकारी, 12 अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी और 10 सहायक अभियोजन अधिकारी, तीसहजारी कोर्ट में 3 मुख्य अभियोजन अधिकारी, लगभग 17 अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी व लगभग 25 सहायक अभियोजन अधिकारी, रोहिणी कोर्ट में 2 मुख्य अभियोजन अधिकारी, 12 अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी व 17 सहायक अभियोजन अधिकारी वहीं पटियाला हाउस कोर्ट में 3 मुख्य अभियोजन अधिकारी, 13 अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी और 25 सहायक अभियोजन अधिकारी हैं। इनमें सरकारी वकीलों का अदालती काम निपटाने के लिए तीसहजारी कोर्ट में 2, पटियाला हाउस कोर्ट में एक, कड़कड़डूमा कोर्ट में एक और रोहिणी कोर्ट में एक स्टेनो नियुक्त हैं। इसके अतिरिक्त एक स्टेनो की नियुक्ति दिल्ली सरकार के गृह विभाग में की गई है।
दिल्ली प्रासिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चौहान और सचिव एसके रघुवंशी ने बताया कि हर सरकारी वकील (अभियोजन अधिकारी) को अपने मामलों के रिवीजन, स्क्रूटनिंग और अन्य कामों के लिए स्टेनो की जरूरत पड़ती है। उन्हें रोजाना के केसों को कम्प्यूटर में दर्ज करना और उसका प्रिंट हासिल करना होता है। इसके लिए हर दो से चार अभियोजन अधिकारियों को एक स्टेनो दिया जाना चाहिए। मगर, इस समय दिल्ली की चारों कोर्ट में कुल पांच स्टेनो ही हैं, जो कि नाकाफी हैं। श्री चौहान ने कहा कि अगर आंकड़ा निकाला जाए तो हर 28 अभियोजन अधिकारियों के हिस्से में एक स्टेनो आता है, जबकि 24 अधिकारियों पर छह स्टेनो होने चाहिए। बहरहाल स्थिति यह है कि जिस कोर्ट में अभियोजन अधिकारियों के पास एक ही स्टेनो हैं, उसमें अधिकारियों को काम कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो अभियोजन अधिकारियों और स्टेनो में पहले काम कराने को लेकर कहासुनी तक हो जाती है। इतना ही नहीं मजबूरी में उन्हें अपना काम बाहर से कराना पड़ता है। कई बार तो उन्हें अदालत में अपने मामले के संबंध में अगली तारीख तक लेनी पड़ जाती है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चौहान का कहना है कि उन्होंने अभियोजन अधिकारियों की परेशानी को देखते हुए स्टेनो की संख्या बढ़ाने की मांग डायरेक्टर आफ प्रासिक्यूशन तथा दिल्ली सरकार के गृह विभाग में प्रधान सचिव से की है। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया है जिससे अभियोजन अधिकारियों काम प्रभावित न हो।