
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने नगर निगम के अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों का शिकायतकर्ता ने स्टिंग ऑपरेशन किया, फिर बुधवार की शाम सहायक अभियंता को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। निगम के दोनों इंजीनियर शाहदरा उत्तरी जोन के मुख्यालय में तैनात थे।
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पुलिस उपायुक्त आईडी शुक्ला के अनुसार, नगर निगम के पंजीकृत ठेकेदार सुधीर भारद्वाज ने शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि नगर निगम में 28 लाख से ज्यादा बिल बकाया है। इसमें से 3.6 लाख रुपये का बिल पास कराने के लिए सहायक अभियंता रविकांत शर्मा 75 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। इसमें उसने अपना हिस्सा 50 हजार तथा अधिशासी अभियंता सुनील कुमार मित्तल का हिस्सा 25 हजार बताया। शिकायत के बाद भारद्वाज ने रविकांत शर्मा की छिपे हुए कैमरे से पूरी रिकॉर्डिग की। भारद्वाज ने सुनील कुमार मित्तल से भी उनका हिस्सा देने के बारे में बात की। सारी रिकॉर्डिग के बाद रिश्वत देना तय हुआ। पहली किश्त में 50 हजार रुपये देने के लिए शर्मा ने भारद्वाज को घर बुलाया। हालांकि मित्तल से बात होने के बाद उसने भारद्वाज को शाहदरा उत्तरी जोन के कार्यालय में ही रकम लेकर आने को कहा। इस दौरान शाखा की टीम करीब आठ घंटे तक शाहदरा उत्तरी जोन के कार्यालय के पास छिपी रही। बुधवार की शाम करीब छह बजे जैसे ही शर्मा ने भारद्वाज से 50 हजार रुपये लिये, टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। फिर रिश्वत के गोरखधंधे में शामिल अधिशासी अभियंता सुनील मित्तल को भी पकड़ लिया गया। गहन पूछताछ के बाद पुलिस ने इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली। आरोपियों कों बृहस्पतिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से इन्हें तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कोड वर्ड में बात करते थे निगम अफसर
नगर निगम के रिश्वतखोर अधिकारी घूस लेने के लिए कोड वर्ड में बात करते थे। स्टिंग आपरेशन से पता चला कि जब ठेकेदार बिल पास कराने के लिए इंजीनियर को फोन करता था तो वो पूछता था कि 'काम शुरू कर दिया, बुलडोजर लगा दो' अर्थात रुपये देने की प्रक्रिया शुरू कर दी, रिश्वत जल्दी से दे दो। जवाब में ठेकेदार कहता था 'काम जल्दी हो जाएगा', यानी रिश्वत शीघ्र पहुंच जाएगी। कुछ इसी तरह के कोड वर्ड में ठेकेदार व इंजीनियर बात करते थे। इनके सभी कोड वर्ड को शाखा ने डिकोड कर लिया है।
सरकार द्वारा निर्माण कार्य के लिए जारी रकम के 50 फीसदी हिस्से की होती है बंदरबांट
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जिस मामले में निगम के दोनों इंजीनियरों को गिरफ्तार किया है, उसकी तहकीकात करें तो पता चलता है कि 3.6 लाख के बिल को पास कराने के लिए सहायक व अधिशासी अभियंता 75 हजार रुपये रिश्वत मांग रहे थे। यह कुल रकम का करीब 21 फीसदी बैठता है। इसके अलावा, ठेकेदार को जूनियर इंजीनियर सहित निगम के अन्य कर्मियों को भी रिश्वत देनी पड़ती है। इसे कुल रकम 10 फीसदी मान लें और ठेकेदार का मुनाफा 20 फीसदी मानें, तो वास्तविक कार्य में कुल रकम का 50 फीसदी से भी कम रकम लगता है। इससे समझा जा सकता है कि सरकारी कार्य में किस तरीके का भ्रष्टाचार फैला हुआ है।