
नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : डीडीए आवासीय योजना-2008 के सफल आवेदकों के लिए खुशखबरी। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा डीडीए को क्लीनचिट देने के बाद हाईकोर्ट ने भी फ्लैटों के आवंटन को हरी झंडी दे दी है। डीडीए ड्रा में गड़बड़ियों को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस जीएस सिस्तानी ने आवासीय योजना विवाद का निपटारा कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले से करीब ग्यारह महीने से जारी डीडीए आवासीय योजना का विवाद तो थमेगा ही 5238 परिवारों का फ्लैट पाने का सपना भी साकार हो सकेगा।
हाईकोर्ट में यश कात्याल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सिस्तानी ने यह फैसला सुनाया है। डीडीए के अधिवक्ता ने आर्थिक अपराध शाखा के पास आई हैदराबाद के जीईक्यूडी और त्रिवेंद्रम स्थित सी-डेक की रिपोर्ट अदालत में जमा कराई। मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को डीडीए के अधिवक्ता राजीव बंसल ने दलील दी कि याचिका दायर करने वाले लोग वे हैं, जिन्होंने आवासीय योजना में आवेदन किया और जब ड्रा में कामयाबी नहीं मिली तो अदालत पहुंच गए। बंसल ने मांग की कि यह व्यवस्था बाकियों पर भी लागू हो, जिन्होंने कोर्ट में योजना के ड्रा में गड़बड़ी की शिकायत के बाद याचिका दायर की है।
गौरतलब है कि बीती 16 दिसंबर को डीडीए की आवासीय योजना-2008 का ड्रा निकाला गया था। मौके पर सैकड़ों तमाशबीनों के अलावा आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ तमाम उच्चाधिकारी उपस्थित थे। ड्रा के बाद हुए विवाद के बाद कई लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। बहुतों ने आरटीआई के माध्यम से प्रक्रिया को जानने का प्रयास किया। गड़बड़ी का पता लगाने और संलिप्त डीडीए कर्मियों को चिन्हित करने के लिए डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में एक आंतरिक कमेटी बनी। उसकी रिपोर्ट में डीडीए अधिकारियों को बेदाग पाया गया। कंप्यूटर साफ्टवेयर और सर्वर की जांच के लिए कंप्यूटर उपकरणों को हैदराबाद स्थित जीईक्यूडी भेजा गया। वहां से आई रिपोर्ट में भी छेड़छाड़ के सबूत नहीं मिले। फिर दूसरी राय लेने के लिए त्रिवेंद्रम स्थित सी-डेक से संपर्क साधा गया। बीते दिनों वहां की रिपोर्ट में भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कंप्यूटर उपकरणों के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई है।