
हिसार, जागरण संवाददाता : देश को खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली देश की हरित क्रांति में विशेष योगदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली 100 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान की राशि का हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय पिछले करीब पांच वर्ष से इंतजार कर रहा है। हरित क्रांति में योगदान के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी को दी ग्रांट के बाद पांच वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिसार में इसकी घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद कृषि मंत्री शरद पंवार ने महाराष्ट्र के दो विश्वविद्यालयों सहित कइयों को यह विशेष ग्रांट दी लेकिन पीएम की चुनावी घोषणा पर दूसरी सरकार बनने पर भी आज तम कोई अमल नहीं हुआ है। मामले के अनुसार केंद्र सरकार ने करीब पांच वर्ष पूर्व हरित क्रांति में विशेष योगदान के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान देने की घोषणा हुई। चूंकि हरित क्रांति में हकृवि के योगदान को भूला नहीं जा सकता, इसलिए इस प्रकार की ग्रांट हकृवि को भी देने की मांग उठी। इसके बाद कहा गया कि इस प्रकार की ग्रांट हर वर्ष किसी ने किसी विश्वविद्यालय को दी जाएगी। इसके बाद पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यहां पुराना गवर्नमेंट कालेज मैदान में चुनावी रैली को संबोधित किया तो हकृवि को भी यह ग्रांट देने की घोषणा कर दी लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हालात यह है कि कृषि मंत्री शरद पंवार ने अपने गृह राज्य महाराष्ट्र के दो विश्वविद्यालयों सहित कई विवि को यह ग्रांट दे चुके है लेकिन प्रधानमंत्री की घोषणा पर अभी तक विचार भी नहीं किया गया है और यह घोषणा अब सिर्फ चुनावी घोषणा बनकर रह गई है। दूसरी तरफ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की बात करे तो, वहां पर इस ग्रांट को खर्च करने के लिए प्रोजेक्ट भी नहीं बने और वह ग्रांट बिना प्रयोग किए ही खत्म हो गई। जयराम रमेश भी भूल गए एक करोड़ हकृवि को मिलने वाली 100 करोड़ रुपये की ग्रांट को जहां प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद कृषि मंत्री ने नजरअंदाज कर दिया वहीं तत्कालीन वाणिज्य मंत्री जयराम रमेश भी अपनी घोषणा की एक करोड़ रुपये की ग्रांट भूल गए। मामले के अनुसार करीब ढाई वर्ष पूर्व तत्कालीन वाणिज्य मंत्री यहां विवि में आए थे और ग्वार के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय शोध को देखकर विवि को एक करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी। यह घोषणा हुए ढाई वर्ष हो गए लेकिन आज इसका अभी तक कोई नामोनिशान नहीं है। ग्रांट नहीं मिली लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत : दलाल हकृवि रजिस्ट्रार डॉ. आरएस दलाल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि विवि को अभी तक यह ग्रांट नहीं मिली है लेकिन विवि की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि विवि को केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व राज्य सरकार ने अनुदान के मामले में पूरा सहयोग मिला है। यही कारण है कि घाटे में चल रहा हकृवि इस समय मुनाफे में है और बजट की कोई कमी नहीं है।