
योगेंद्र शर्मा, अंबाला
इन दिनों राजनीति में भ्रष्टाचार, धनबल, बाहुबल को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। इसी माहौल में चार दशक से राजनीति में पारदर्शिता, ईमानदारी का संदेश देने वाले आर्य समाज के प्रचारक पं. सत्यपाल पथिक का मानना है कि वर्तमान में स्वामी दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं पर यदि ठीक तरह से अमल हो तो राजनीति में पूरी तरह से स्वच्छता संभव है।
हरियाणा में आर्य समाज के प्रचार-प्रसार के लिए निकले आर्य भजन उपदेशक पंडित सत्यपाल पथिक ने दैनिक-जागरण से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि वे सिंगापुर, दिल्ली, मुंबई सहित दर्जनों महत्वपूर्ण स्थानों पर प्रचार-प्रसार कर चुके हैं। वे गीतों के साथ लेख भी लिखते हैं। 13 मार्च, 1938 को पाकिस्तान के जिला स्यालकोट दुलम में स्व. लालचंद के परिवार में जन्मे पंडित पथिक मानते हैं कि वर्तमान में राजनीतिक क्षेत्र में स्वच्छता की जरूरत है। पंडित पथिक बताते हैं कि उनकी माता कर्मदेवी का आशीर्वाद और पत्नी कृष्णादेवी का सहयोग मिलने के चलते आज वे देश व इसके बाहर आर्य समाज का संदेश देने में सफल रहे हैं।
राजनीतिक माहौल और देश में राजनेताओं की लगातार गिरती छवि को लेकर चिंतित पंडित सत्यपाल पथिक मानते हैं कि आर्य समाज, स्वामी दयानंद सरस्वती के संदेश पर चलकर ही राजनीति को सुधारा जा सकता है। अमृतसर के गोकुल नगर के मजीठा रोड पर रहने वाले पथिक की सीडी और कैसेट में लगभग छह भजन उनके खूब सुने जाते हैं। महर्षि दयानंद की शिक्षाओं पर चलने वाले पथिक सात दशक का जीवन जी चुके हैं। साथ ही चाहते हैं कि अंतिम समय तक समाज की सेवा का काम करें।
उन्होंने एक सवाल के उत्तर में कहा कि सिंगापुर हो या फिर मुंबई, दिल्ली देश के कई हिस्सों व विदेशों में उन्होंने दयानंद सरस्वती का संदेश दिया है। वे चाहते हैं कि राजनीति में स्वामी दयानंद जैसे लोग आएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वे समाजसेवा, राजनीति में सुधार के लिए आगे आएं। उनका यह भी कहना है कि राज करने का अधिकार चंद परिवारों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी लोगों को मौका मिले, बेहतर काम करने वालों को दोबारा मौका दिया जाए। अहम बात यह भी है कि पंडित सत्यपाल पथिक के लिखे भजन स्वामी रामदेव महाराज व सुधांशु जी महाराज भी गाते हैं।
उपासने ते हवन, वैदिक संध्या जैसी पुस्तकों में उन्होंने पंजाब के लोगों को भी शुद्ध उच्चारण करने की शिक्षा दी है। उन्होंने लगभग एक हजार भजन और गीत लिखे हैं। पंडित सत्यपाल पथिक चाहते हैं कि स्वामी दयानंद सरस्वती का संदेश पूरे विश्व में फैलाने के लिए युवा वर्ग आगे आएं।