
बिलासपुर
बिलासपुर व ऋषिकेश के बीच गोबिंदसागर झील में शुक्रवार सायं 15 लोग डेढ़ घंटा तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। तूफान में फंसे लोगों के लिए मात्र भगवान ही सहारा था।
नाले के नौणघाट से करीब 15 लोगों को लेकर मोटरबोट ऋषिकेश की ओर रवाना हुई। अभी बोट झील के बीच ही थी कि अचानक आए तूफान से मोटरबोट डगमगाने लगी। तेज लहरों के कारण मोटरबोट हिचकोले खाने लगी। लोगों के पास भगवान से प्रार्थना करने के सिवाय कोई चारा नहीं था। मोटरबोट में सफर कर रहे लोगों ने बताया कि करीब डेढ़ घंटे तक वे लहरों के बीच जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। चालक ने मोटरबोट को किनारे पर लाने का पूरा प्रयास किया लेकिन तेज लहरों के बीच वह भी कुछ पल के लिए हिम्मत हार बैठा। लहरों के बीच हिचकोले खाते मोटरबोट ऋषिकेश घाट से बहुत दूर कोठी गांव के समीप नाले के पास किनारे पर लगी, जिस पर लोगों ने राहत की सांस ली। ऐसे हालात में मोटरबोट में सफर करने को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की खामियां भी उजागर हुई। दोनो घाटों को आपस में जोड़ने के लिए मोटरबोट का सफर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन इनमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। गोबिंदसागर तेज लहरों के कारण मोटरबोट में दो हादसे हो चुके हैं। ऐसा लगता है कि भविष्य में भी व्यवस्था रामभरोसे ही रहेगी। गौर हो कि ऋषिकेश व साथ लगती कई पंचायतों के लोग हर रोज अपने कार्यो के लिए गोबिंदसागर झील से बिलासपुर आते हैं। यदि समय रहते गंभीर समस्या पर विचार न किया गया तो बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा मोटरबोट के माध्यम से सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए आज तक कोई विशेष इंतजाम नही किए गए हैं। मोटरबोट में टायर टयूब तक नहीं होती है। उन्होंने कहा कि बोट के किनारे गाड़ियों के टायर लगाए जाते हैं, जो रगड़ आदि लगने से बोट को बचाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि हर मोटरबोट में क्षमता के अनुसार लाइफ जैकेट होनी चाहिए, ताकि मुसीबत के समय लोग अपनी जान बचा सकें। यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं ब्राह्मणीघाट को जाने वाला मोटरबोट पांच घंटे झील में फंसा रहा। इसमें दस लोग सवार थे।