
बिलासपुर
जिले के दूरदराज क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाओं का अभाव है। इनमें प्रसव सुविधाएं न मिलने से कई बार शिशुओं की जन्म के समय ही मृत्यु हो जाती है।
जिले में कुछ ऐसे दूरस्थ स्थान हैं जहां महिलाओं के लिए प्रसव सुविधा नहीं है। लोगों को आज भी दाइयों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रसव के दौरान शिशुओं की मृत्यु दर 11.84 प्रतिशत है। कई बार महिला को उस समय अस्पताल पहुंचाया जाता है जब उसकी स्थिति बहुत गंभीर होती है। ऐसे में चिकित्सकों को मरीज की जान को जोखिम में डालकर प्रसव करना पड़ता है। हालांकि जिले में स्वास्थ्य संस्थानों की कमी नहीं है। जिला मुख्यालय में क्षेत्रीय अस्पताल के अलावा 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिले में डाक्टरों के कई पद रिक्त हैं जिन्हें भरने की तरफ सरकार ध्यान नहीं दे रही है। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 33 पद रिक्त हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पांच पद रिक्त हैं। जिले में चिकित्सकों के 92 पद स्वीकृत हैं। बिलासपुर अस्पताल में एनस्थीसिया का एक ही चिकित्सक कार्यरत है। अगर वह लंबी छुट्टी पर चला जाए तो मरीजों के आपरेशन तक नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का भी एक ही पद भरा गया है, जबकि इसके लिए क्षेत्रीय अस्पताल में दो पद स्वीकृत हैं।
रिक्त पद भरने का प्रयास जारी : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. बीडी शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजनाओं का लाभ जनता को पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर चिकित्सकों के पद रिक्त हैं वहां इन्हें भरने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने हाल ही में कुछ चिकित्सकों की नियुक्ति की है, जिनमें से कुछ ने कार्यभार नहीं संभाला है। वे भी शीघ्र कार्यभार संभाल लेंगे।