
बिलासपुर-12 अक्टूबर का दिन बिलासपुर के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन है। आज से 54 वर्ष पूर्व बिलासपुर रियासत का भारत गणराज्य में विलय हुआ था यानी इसे बिलासपुर की जयंती भी कहा जा सकता है।
बिलासपुर की रियासत भारत की आजादी के एक वर्ष दो माह के बाद भारतीय संघ में शामिल हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन बिलासपुर में राजा का शासन चला रहा। सभी रियासतें भारतीय गणराज्य में शामिल हो गई, परंतु बिलासपुर के राजा को मनाने में सभी असफल रहे। लिहाजा 12 अक्टूबर, 1948 को इसे भारत गणराज्य में मिलाने में कामयाबी मिल पाई। बिलासपुर में प्रजामंडल के आंदोलन कर्ताओं ने अपना आंदोलन भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात भी जारी रखा था। इन आंदोलनकारियों में सदा राम चंदेल, काली दास, दौलत राम सांख्यान, संत राम संत, कांशी राम उपाध्याय, देवी राम उपाध्याय थे तथा वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी एडवोकेट नरोत्तम दत्त शास्त्री भी इनके साथ थे। अब सिर्फ वही एकमात्र जीवित रहे है जो सारा हाल आंखों देखा बयान कर सकते है। एक वर्ष दो महीनों को इन आंदोलनकारियों ने खूब गरम रखा तथा गतिविधियां जारों से चलती रही। बिलासपुर रियासत के अंतिम राजा आनंद चंद को मुखबिरों द्वारा कुछ सूचनाएं उपलब्ध हो जाती थीं फिर वह इन आंदोलनकारियों की गतिविधियों को दबाने के लिए अपनी सेना भेज देता था, परंतु प्रजामंडली भी नित नई चालें चलते और राजा के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देते। इन एक वर्ष दो महीनों में प्रजा मंडलियों की कर्मस्थली सतलुज के उस पार राहियां गांव रही, जहां पर बड़े-बड़े फैसले इन लोगों ने किए। राहियां के पास ही औहर नामक स्थान पर आंदोलनकारियों की झड़प राजा के सैनिकों से हुई, परंतु ये लोग झंडा हाथ में लिए आगे ही बढ़ते रहे।
12 अक्टूबर को पुराने बिलासपुर शहर में रंगनाथ के स्थान पर (यह स्थान अब जलमग्न हो चुका है) एक बड़ा जलसा आयोजित किया गया था जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन राजा स्व. आनंद चंद ने की थी। इस मौके पर सबसे पहले झंडा गान हुआ था और स्वतंत्रता सेनानी श्यामा नंद ने स्वरचित यह कविता पढ़ी थी। 'लहराया आज यह झंडा, मुबारक हो मुबारक हो, हटा है जुल्म का झंडा, मुबारक हो मुबारक हो।' इस पर राजा आनंद चंद ने अपना सर झुका लिया था। इस पर उन्होंने आगे कहा था कि 'जो करते है जुल्म हम पर नंगू सिर आज है देखो, हुआ जब जोश वो ठंडा मुबारक हो मुबारक हो।' इस जलसे में सभी प्रजा मंडली बोले थे तथा सबने शब्दों से राजा की धुनाई की थी। 12 अक्टूबर, 1948 को आजादी के ये दीवाने अपनी इस जन्मभूमि को राजा रजवाड़ों से मुक्त करवाने में सफल हुए थे जो वर्षो से अधीन थी। वर्षो तक जिलावतनी व अनेक कष्ट सहकर खुशी का यह जलसा वाकई अद्भुत था। यहां यह जिक्र करना भी उल्लेखनीय रहेगा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत बिलासपुर रियासत दो तहसीलों के होते तथा डेढ़ लाख की जनसंख्या होने पर भी इसे 'ग' श्रेणी का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और इसके चीफ कमिश्नर राजा आनंद चंद ही थे। उस समय 31 रियासतों से बना हिमाचल भी 'ग' श्रेणी का राज्य यानी केंद्र शासित प्रदेश था जिससे हिमाचल व बिलासपुर दोनों राज्य थे और इन्हें एक सा ही दर्जा प्राप्त था। आगामी छह वर्षो तक बिलासपुर 'ग श्रेणी का राज्य रहा तथा जुलाई, 1954 को जिला के रूप में इसका विलय हिमाचल में हुआ।