
बिलासपुर : हिमालयन नीति अभियान समिति के अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु ने वनों पर सामुदायिक अधिकारों को कानूनी दर्जा दिए जाने का स्वागत किया है और कहा है कि इस कानून को लागू करने से पहले इस पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। समिति चाहती है कि गांव के बर्तनदारी दायरे को नजदीकी प्रबंधन के लिए स्थानीय समुदायों तथा वन विभाग के संयुक्त प्रबंधन में लाया जाए जिसमें वन विभाग के पथ प्रदर्शन में समुदाय सक्रिय प्रबंधन की भूमिका को निभाए। इस कानून को लागू करने से पहले इस पर विचार-विमर्श करने के लिए बिलासपुर में सर्वदलीय बैठक में विभिन्न मसलों पर विस्तृत चर्चा भी की गई।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की परिस्थिति में अधिक तक अवैध कब्जों की मान्यता सीमा पांच बीघा होनी चाहिए, यानी पांच बीघा जमीन वालों के अवैध कब्जे ही नियमित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों के लिए अधिकतम सीमा 10 बीघा रखी जाए। अन्य वन निर्भर समुदायों को कानून का लाभ लेने के लिए प्रावधान यह है कि वे 1930 से उस गांव में रहते हों। उपमन्यु ने बताया कि इस प्रावधान से भाखड़ा तथा पौंग बांध के विस्थापितों को छूट दी जानी चाहिए जो जनजातीय क्षेत्रों के लिए मान्य है। समिति के संयोजक गुमान सिंह ने बताया कि इस बारे में सभी दलों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं का सम्मेलन बिलासपुर में हुआ और इसमें आगे की कार्रवाई चलाने के लिए एक समिति का गठन किया गया जो केंद्र सरकार से वार्ता करेगी तथा उसे तथ्यों सहित लिखेगी, ताकि कानून में सुधार किया जा सके। उन्होंने बताया कि समिति एक सप्ताह तक अपने कार्य को अंजाम देगी और बाद में एक और बड़ा सेमिनार आयोजित किया जाएगा, ताकि इस विषय पर और अधिक चर्चा की जा सके।