
विशेष संवाददाता, श्रीनगर : शांति की ओर लौटती जा रही घाटी में ताबड़तोड़ दो बड़ी वारदातें कर आतंकियों ने न सिर्फ यहां काफी दिनों से छाई खामोशी भंग की है, बल्कि अपनी उपस्थिति के बारे में सरकार को एक बार फिर सोचने को मजबूर किया है। शनिवार को भी तमाम सुरक्षा प्रबंधों को भेदते हुए आतंकियों ने सैन्य काफिले में जा रहे वाहन को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया। लाल चौक से करीब 12 किलोमीटर दूर श्रीनगर-मुजफ्फराबाद सड़क पर नारबल में हुए इस बड़े आतंकी हमले में सेना के कम से कम 9 जवान शहीद हुए जबकि 20 अन्य जख्मी बताए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने नौ सैनिकों की शहादत की पुष्टि की है। यह आईईडी विस्फोट उसी सड़क पर हुआ है जिस पर पाकिस्तान के लिए अमन का संदेश लेकर कारवान-ए-अमन चलती है। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने हमले की जिम्मेवारी ली है। गौरतलब है कि इससे एक ही दिन पहले शुक्रवार को आतंकियों ने बनिहाल में भी सीआरपीएफ की जिप्सी पर ग्रेनेड हमला किया था जिसमें 34 लोग घायल हुए थे।
घायल जवानों को हेलीकाप्टर के जरिये बादामी बाग स्थित सैन्य अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। विस्फोट के बाद पुलिस और सेना के जवानों ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेरते हुए आतंकियों को पकड़ने के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया है। विस्फोट के लिए आतंकियों ने सड़क पर जारी निर्माण कार्य का फायदा उठाते हुए निर्माण सामग्रियों के बीच में ही आईईडी को छिपाकर रखा था। इस सड़क की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ की थी। संबंधित अधिकारियों का दावा है कि विस्फोट को रिमोट से अंजाम दिया गया। कश्मीर रेंज के आईजी, डीआईजी और सेना के वरिष्ठ अधिकारी विस्फोट की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए।
इस बीच, गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद से हिजबुल मुजाहिदीन के मुख्य प्रवक्ता अहसान इलाही ने फोन पर इस विस्फोट की जिम्मेदारी लेते हुए 15 सैन्यकर्मियों के मारे जाने और 20 अन्य के जख्मी होने का दावा किया है। यह विस्फोट 24 जून 2005 को इसी सड़क पर हुए धमाके के बाद दूसरी बड़ी वारदात है जिसमें इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचा है। जून 2005 को हुए धमाके में नौ सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 23 मई 2004 को श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर आईईडी के जरिये विस्फोट में 19 बीएसएफ कर्मियों व उनके 16 परिजनों की जान लेने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन का यह दूसरा बड़ा हमला है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट इतना तीव्र था कि इसकी चपेट में आया सैन्य वाहन हवा में करीब आठ-दस फुट ऊपर उछला और कलाबाजियां खाते हुए सड़क पर पलट गया। हवा में ही गाड़ी के परखचे बिखरते देखे गए। वाहन में सेना की विभिन्न यूनिटों के 34 जवान सवार थे। इनमें से अधिकतर छुट्टी पर अपने घर जा रहे थे।
विदित हो कि शनिवार को उड़ी-बारामूला से सैन्य वाहनों का एक काफिला श्रीनगर की तरफ आ रहा था। पौने चार बजे के करीब यह काफिला जब नारबल चौक पर पहुंचा तो उस समय वहां जबरदस्त यातायात के कारण एक तरफ जाम लगा हुआ था। जैसे ही काफिला चौराहे से गुजरने लगा, वहीं कहीं आसपास छिपे आतंकियों ने सड़क पर पहले से छिपाकर रखी गई आईईडी में रिमोट से धमाका कर दिया। इसकी चपेट एक बस आ गई।
प्रत्यक्षदशियों ने बताया कि धमाका होते ही वहां आग की लपटों के बीच काले धुएं का एक बड़ा गुबार नजर आया। विस्फोट इतना तीव्र था कि इसके कारण वहां आसपास मौजूद अन्य वाहनों की खिड़कियों के शीशे चटख गए। बस हवा में उछलते हुए नीचे गिरी तो घायल सैनिकों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। इसके बाद पूरा सैन्य काफिला उसी समय रुक गया और अन्य वाहनों में सवार सैनिकों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने अपने घायल साथियों को उसी समय बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया।
विस्फोट की सूचना मिलते ही वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। घायल सैनिकों को हेलीकाप्टर के जरिये सेना के बेस अस्पताल में लाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सात सैनिक मौके पर ही शहीद हो गए जबकि एक अन्य ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।