
कठुआ : विस क्षेत्र कठुआ से पहली बार आजाद उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमा रहे स्टेट हैडलूम के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर 57 वर्षीय चरणजीत सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। कठुआ के जंगलोट गांव में जन्मे चरणजीत सिंह ने दसवीं तक की शिक्षा जंगलोट से ही प्राप्त की। उसके बाद डिग्री कालेज से स्नातक करने के बाद टीचर नियुक्त हुए। इसी दौरान वह केएएस में उर्तीण हुए और तहसीलदार बने। उनके पिता सरकारी शिक्षक थे, जिनसे उन्होंने ईमानदारी का पाठ पढ़ा। उसी ईमानदारी को जीवन का सिद्धांत बनाया, जिसने उन्हें राज्य सरकार से गोल्ड मेडल दिलवाया। कठुआ में उनकी पहचान यहां पर तीन साल तक एडीसी के पद पर किए गए कार्यो से हुई। इससे पहले वह आरटीओ और एडीडीसी जम्मू के पद पर भी अपना दायित्व बखूबी निभाया। जसरोटिया तीन भाईयों में सबसे बड़े हैं। एक भाई कठुआ कोर्ट में वकालत करता है, जबकि दूसरा एनएचपीसी में सुपरवाइजर है। दो बच्चों के पिता जसरोटिया की पत्नी सरकारी स्कूल में टीचर हैं।
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फोटो नंबर 9 में
गिरधारी लाल : कांग्रेस (हीरानगर विस क्षेत्र)
कठुआ : विस क्षेत्र हीरानगर से तीसरी बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव में भाग्य आजमा रहे गिरधारी लाल इससे पहले विधायक रह चुके है। सरकार ने एससी-एसटी एडवाइजरी बोर्ड का वाइस चेयरमैन नियुक्त कर उन्हे राज्य मंत्री का दर्जा दे रखा था। मूल रूप से हीरानगर के सूबे चक गांव के दित्तो राम कृषक के घर में जन्मे गिरधारी लाल चार भाईयों में सबसे छोटे हैं। दसवीं तक शिक्षा प्राप्त कर वे पुलिस विभाग में बतौर सिपाही भर्ती हुए और सब इंसपेक्टर के पद से रिटायर होकर कांग्रेस के जुड़ गए। वह शुरू से ही हीरानगर के मशहूर नेता स्व: गिरधारी लाल डोगरा को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। 1996 में उन्हे कांग्रेस ने हीरानगर विस क्षेत्र से पहली बार टिकट दिया, लेकिन वह हार गए। उसके बाद 2002 में फिर कांग्रेस की टिकट पाने में सफल रहे और रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की।
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फोटो नंबर 8 में
कांता अंदोत्रा: कांग्रेस (बसोहली विस क्षेत्र)
कठुआ : विस क्षेत्र बसोहली से कांग्रेस की टिकट पर दूसरी बार भाग्य आजमा रही 48 वर्षीय कांता अंडोत्रा ऊधमपुर के वर्तमान सांसद लाल सिंह की पत्नी हैं। मूल रूप से कठुआ के वार्ड दो की निवासी कांता ने कठुआ डिग्री कालेज से स्नातक की है। कांता ने प्रारंभिक शिक्षा मायके हीरानगर के गांव मढ़ीन में पूरी की है। वह लाल सिंह की कालेज के दिनों में सहपाठी भी रह चुकी हैं। हालांकि उनकी पृष्ठभूमि एक गृहणी की रही है, लेकिन पति के सक्रिय राजनीति में भाग लेने से वह उनके साथ-साथ रही। 2004 में अचानक लाल सिंह कठुआ-ऊधमुपर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए तो वह पहली बार ही बसोहली से कांग्रेस की विधायक बन गई। जिले में पहली महिला विधायक बनने का श्रेय कांता को ही जाता है। अब वह दूसरी बार बसोहली विस से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।