
;श्रीनगर, जागरण ब्यूरो : एक तरफ सेना प्रमुख समेत सभी वरिष्ठ सैन्याधिकारी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोताही से लगातार इंकार करते हैं, वहीं पिछले दिनों एलओसी से सटे कुपवाड़ा जिले के जंगलों से जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर के आतंकियों का एक बड़ा दल दो सैन्य यूनिटों के आपसी तालमेल के अभाव में बच निकला।
यह कोई कल्पना नहीं है, बल्कि राज्य गृह विभाग के पास उपलब्ध एक सूचना में संबंधित अधिकारियों ने सेना के इस आचरण पर रोष जताया है। गृह विभाग के पास उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य पुलिस की खुफिया शाखा ने अपने तंत्र के जरिए पता लगाया कि लोलाब इलाके में दुरसवानी के जंगल में जैश और लश्कर के दो दर्जन से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं। इनमें कुछ हाल ही में सीमा पार से घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं। यह आतंकी वहां से कश्मीर घाटी के अन्य इलाकों में अपने ठिकानों की तरफ कूच करने की योजना पर काम कर रहे थे।
पुलिस ने इस सूचना के आधार पर संबंधित सैन्याधिकारियों से संपर्क करते हुए उनसे आतंकियों के खिलाफ एक त्वरित व सुनियोजित अभियान चलाने का आग्रह किया। क्योंकि जिस इलाके में आतंकी बैठे थे और जो उनके पास हथियार थे, उनके मुताबिक सिर्फ सेना केजवान और पैरा ट्रूपर ही उनके ठिकानों पर हमले में कामयाब हो सकते थे।
अलबत्ता, सेना की दो यूनिटों ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई का जिम्मा एक दूसरे पर थोपते हुए कहा कि यह उनके एरिया आफ आप्रेशन से बाहर है, यह दूसरी यूनिट की जिम्मेदारी है। इस क्षेत्र में तैनात सेना की यूनिटों ने कहा कि इस इलाके में आरआर भी है और राज्य पुलिस की एसओजी भी। लिहाजा, पहले यह तय किया जाए कि आतंकी किसके इलाके में हैं और उसके बाद आप्रेशन शुरू होगा।
बड़ी मुश्किल से यह विवाद सुलझा और जब सेना व अन्य एजेसियां आतंकियों के खिलाफ अभियान को शुरू करने के लिए दुरसवनी के जंगल में पहुंची तब तक कई आतंकी वहां से निकल चुके थे।
सूत्रों की मानें तो इस इलाके में कश्मीर के विभिन्न इलाकों से भर्ती किए गए स्थानीय लड़कों को भी तथाकथित तौर पर ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस सिलसिले में जब श्रीनगर स्थित रक्षामंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस बरार से संपर्ककिया गया तो उन्होंने किसी भी प्रतिक्रिया से इंकार किया।