
सिमडेगा। जिला मुख्यालय के पूर्वी भाग में सुरम्य प्रकृति की गोद में स्थित सरना मंदिर लंबे कालखंड से भक्तों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। दो ओर से पहाड़ियों व हल्के जंगल से घिरा तथा दक्षिणी ओर बह रही छिंदा नदी के किनारे स्थित सरना मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर श्रद्घालुओं की बहुत आस्था है तथा शिवभक्त सालोंभर यहां आकर पूजन करते है। सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर परिसर में स्थित दो कुओं से दूध सा सफेद जल निकलता है। प्रतिदिन दर्जनों भक्त अहले सुबह उठकर मीलों चलकर सरना मंदिर पहुंचते है और कुएं पर स्नान करके भगवान शिव को जल अर्पित करते है। मंदिर के अहाते में शिव मंदिर के अलावा बजरंग बली एवं अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर है। सावन के महीने में यहां लगभग हर रोज श्रद्घालुओं द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है। भक्तगण भंडारे में शामिल होकर दाल चूरमा के विशेष प्रसाद का आनंद उठाते है। अति प्राचीन इस मंदिर के भवनों का जीर्णाेद्घार कार्य चलता रहता है। कुछ समय पूर्व काशीराम राधाकृष्ण कुलुकेरिया परिवार की ओर से मंदिर में जीर्णोद्घार एवं सजावट का कार्य कराया गया है। मंदिर परिसर में सरना सेवा संघ के द्वारा गो पालन का कार्य भी किया जाता है। मंदिर के प्रति भक्तों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगने पर भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। मंदिर तक पहुंचने का करीब एक किलोमीटर पथ प्रशासन द्वारा पीसीसी कराया गया है। हालांकि प्रिंस चौक से देवीगुड़ी चौक तक पहुंच पथ के बदहाल होने से श्रद्घालुओं को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ता है।