
जमशेदपुर। एक बार फिर अंग्रेजी स्कूलों ने अभिभावकों की जेब ढीली करने का अभियान शुरू कर दिया है। यह अलग बात है कि किसी स्कूल ने सीधे-सीधे शिक्षण शुल्क बढ़ा दिया है तो कुछ ने ऐसा न कर घुमाकर कान पकड़ा है। बढ़ती महंगाई के बोझ तले पहले से दबे अभिभावकों की कमर बच्चों के लिए महंगी होती शिक्षा के कारण टेढ़ी होती जा रही है। सत्र शुरू होते ही शहर के अंग्रेजी स्कूलों ने एकमुश्त फीस में बढ़ोत्तरी कर दी। अजीब बात यह रही कि इस बढ़ोत्तरी में कहीं भी एकरूपता नहीं थी। हर स्कूल ने अपने-अपने ढंग से शुल्क बढ़ा दिया। अभी सत्र शुरू हुए ज्यादा दिन भी नहीं हुए कि बिष्टुपुर स्थित सेंट मेरीज स्कूल द्वारा बढ़ाये गये शिक्षण शुल्क को लेकर बवेला मच गया है। इस स्कूल ने एकाएक पिछले महीने शिक्षण शुल्क के नाम पर 90 रुपये बढ़ाने की घोषणा कर दी। इस अचानक वृद्धि से अभिभावकों में स्कूल प्रबंधन के प्रति आक्रोश व्याप्त हो गया है। उसकी देखादेखी अन्य स्कूलों ने अधिक पैसे वसूलने का दूसरा रास्ता अख्तियार किया। अब मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल को ही लें। पिछले महीने नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए फरमान जारी हुआ कि वे सभी 50-50 रुपये जमा करें। रुपये जमा करने पर उन्हें इंडिया टूडे की प्रति दी जायेगी। नौवीं कक्षा में लगभग डेढ़ सौ छात्र हैं। सभी को रुपये जमा करने के लिए मजबूर किया गया। जब एक छात्र ने कहा कि उसके घर में उक्त पत्रिका नियमित रूप से आती है तो उसे जवाब मिला, 'तो फिर यहां क्यों आते हो, स्कूल को भी अपने घर में ले जाओ।' वहीं केरला समाजम सहित कुछ अन्य स्कूलों में भी प्रतियोगी पत्रिकाओं को खरीद कर पढ़ने की सलाह दी गयी है। हालांकि इसमें एक बात यह जरूर है यह केवल सलाह है और छात्रों के लिए बाध्यकारी नहीं किया गया है। बहाना कोई भी हो इससे एक ओर जहां स्कूलों की चमक-दमक बढ़ रही है वहीं अभिभावकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी। लेकिन करें क्या? आखिर बच्चे के भविष्य का सवाल है। मन में यह भय कि कहीं स्कूल मैनेजमेंट नाराज हो गया तो खामियाजा उनके बच्चे को भुगतना पड़ेगा।
स्कूलों की मनमानी : कितनी वाजिब
मनमाने ढंग से फीस बढ़ाना स्कूलों का शगल हो गया है। इसकी वजह इस मामले में किसी प्रकार का ठोस नियम का नहीं होना है। जो नियम हैं भी उनके कड़ाई से अनुपालन में इच्छाशक्ति का अभाव दिखता है। कुछ समय पहले तक तो यही कहा जाता रहा था कि स्कूल अपने संसाधन बढ़ाने के लिए शुल्क में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। लेकिन वर्तमान में सीबीएसई या आईसीएसई से संबद्धता के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए राज्य सरकार द्वारा जो दिशा-निर्देश तय किये गए हैं उसके अनुसार किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार होना चाहिए। इसके बाद भी शुल्क वृद्धि से पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी व क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक को पूर्व सूचना देकर अनुमति लेनी होगी, तभी फीस वृद्धि लागू की जा सकती है। हालांकि संबंधित नोटिफिकेशन के खिलाफ स्कूल ने न्यायालय की शरण ली और मामला न्यायालय में विचारधीन है।
सेंट मेरीज का मामला
बिष्टुपुर स्थित सेंट मेरीज स्कूल द्वारा अचानक पिछले महीने 90 रुपये की बढ़ोत्तरी के मामले में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय ने दखल देते हुए स्कूल प्रबंधन से मुलाकात कर शुल्क बढ़ोत्तरी को वापस लेने का अनुरोध किया था। हालांकि इसके बावजूद प्रबंधन अपने स्टैंड से झुकने को तैयार नहीं है।
आईसीएसई ने डाला बोझ
स्कूलों द्वारा स्थानीय स्तर पर फीस बढ़ाने की बात अलग है। दूसरी ओर इस सत्र से कौंसिल फोर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन्स ने अपने स्तर से शुल्क में काफी बढ़ोत्तरी कर डाली है। इस वृद्धि का बोझ भी अंतत: अभिभावकों पर ही पड़ेगा। यह बढ़ोत्तरी इसी सत्र से लागू की गयी है।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई : डीसी
स्कूलों द्वारा फीस में बढ़ोत्तरी किये जाने के मामले में पूछे जाने पर उपायुक्त रवीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि यदि कोई स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोत्तरी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। सेंट मेरीज द्वारा फीस बढ़ाये जाने के मामले में उन्होंने कहा कि अभी तक इस मामले में कोई शिकायत उन्हें नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
आईसीएसई की संशोधित दरें
पुराना नया
वार्षिक निबंधन- 3,500 10,000
अपग्रेडेशन एफलियेशन--25,0000
नौवीं कक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क प्रति छात्र 75 500
11वीं के लिए अर्हता शुल्क प्रति छात्र 500 1000
माइग्रेशन शुल्क 50 150
डुप्लीकेट माइग्रेशन 65 500
डुप्लीकेट स्टेटमेंट मार्क्स 450 1000
रिजल्ट का विवरण 125 500
डुप्लीकेट एडमिट कार्ड 20 500
लिपिकीय त्रुटियों को ठीक करने के लिए शुल्क --- 1000
12वीं का परीक्षा शुल्क 455 2,100
10वीं का परीक्षा शुल्क 520 2,100
केन्द्र परिवर्तन शुल्क ---- 800
उत्तरपुस्तिकाओं की पुन: जांच प्रति विषय के लिए शुल्क 400 800
परीक्षा विलंब शुल्क 50 150