
जमशेदपुर। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा नये प्रखंडों की मंजूर सूची में आश्चर्यजनक रूप से कोवाली का नाम नदारद है। इसे देख एक बार फिर कोवाली निवासी उग्र आंदोलित की राह पर हैं। इस बार भी आंदोलन की कमान झारखंड पीपुल्स पार्टी के नेता सूर्य सिंह बेसरा ने संभाल ली है। बेसरा ने इसके लिए जोरदार आंदोलन का ऐलान करते हुए पोटका के विधायक आमूल्यो सरदार से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगा है।
मंगलवार को बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि 25 वर्षो से कोवाली को पोटका से अलग कर नये प्रखंड का दर्जा देने की मांग की जा रही है। इसके लिए उनके नेतृत्व में 1983 से लड़ाई लड़ी जा रही है। वर्ष 2000 में पूर्वी सिंहभूम की उपायुक्त निधि खरे ने इस मामले में संयुक्त सचिव को रिपोर्ट भेजी थी। कोवाली को अलग प्रखंड का दर्जा नहीं मिलने पर बेसरा ने झामुमो के विधायक अमूल्यो सरदार को भी निशाने पर लिया। लगे हाथ उन्होंने नैतिकता के नाम पर आमूल्यो से इस्तीफा भी मांगा। बेसरा का कहना था कि कोवाली पंचायत से सबसे अधिक वोट पाने वाले विधायक गांव के हजारों लोगों को उनका अधिकार दिलाने में विफल रहे हैं। इसलिए उन्हें नैतिकता के आधार पर सरकार से इस्तीफा दे देना चाहिए। बेसरा ने ऐलान किया है कि कोवाली को प्रखंड का दर्जा दिलाने के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। इसके लिए पार्टी ने 7 सितंबर को कोवाली में जनसभा का ऐलान भी किया है। संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के प्रेस प्रवक्ता डा. बीसी राय, राज कुमार कर्मकार आदि भी उपस्थित थे।
प्रस्तावित कोवाली प्रखंड के गांव कोवाली को पोटका से अलग कर बनाये जाने वाले कोवाली प्रखंड में बेसरा के तैयार मसौदे में कोवाली, नारदा, डेगम, हेरेना, भीलाईडीह, भालकी, आमलातोला, माको, खैरपाल, हलदीपोखर, रसूनचोपा, चाकड़ी पंचायतों को शामिल किया गया है। ये पंचायत पोटका प्रखंड कार्यालय से काफी दूर हैं। इन पंचायतों के ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय आने में काफी कठिनाई होती है। इलाके के विकास और लोगों की परेशानियों को मुद्दा बनाते हुए सूर्य सिंह बेसरा ने दो दशक पूर्व कोवाली को अलग प्रखंड का दर्जा देने की लड़ाई शुरू की थी।