
जमशेदपुर। आवारा कुत्तों का आतंक कैसा होता है, यह कोई गैर कंपनी इलाकों में रहने वालों से पूछे। अकेले मानगो में बीते एक सप्ताह के दौरान लगभग दो दर्जन बच्चों को आवारा कुत्ते शिकार बना चुके हैं। मानगो के आजादनगर, जाकिरनगर, डिमना रोड, मुंशी मोहल्ला, न्यू सुभाष कालोनी, टीचर्स कालोनी व संजय पथ सहित अन्य मोहल्लों में रात को गुजरना मुश्किल है। वहीं गोविंदपुर, परसुडीह, प्रमथनगर, करनडीह, सरजामदा, जुगसलाई, कीताडीह व बागबेड़ा में भी दोपहर या रात में खाली हाथ निकलना खतरे से खाली नहीं होता।
मानगो के कई क्षेत्रों में तो कुत्तों ने बच्चों का निकलना मुश्किल कर रखा है। लोग इतना परेशान हो चुके हैं कि घर से हाथ में डंडा लेकर निकलते हैं। यहां रात ही नहीं दिन को भी लगभग हर गली में कुत्तों का झुंड मौजूद रहता है। दर्जनों लोग इन कुत्तों के आतंक का शिकार हो चुके हैं। न्यू सुभाष कालोनी, शंकोसाई, टीचर्स कालोनी, अनुग्रह नारायण कालोनी में कुत्तों ने आतंक कायम कर रखा है। मानगो निवासी टेम्पो चालक राजू पाल का कहना है कि कुत्तों के कारण बच्चे घर से बाहर निकलने में डरते हैं।
इनसेट- सिंगल कालम इसमें टिकट साइज फोटो के साथ लोगों के बयान रहेंगे
लोगों की व्यथा-कथा
मीता पाल का भी कहना है कि अकेले घर से बाहर निकलने में डर लगता है। माला रानी पाल ने कहा कि कुत्ते गंदगी फैलाने के साथ ही पूरी रात इस कदर भौंकते हैं कि सोना मुश्किल हो जाता है। किरण तिवारी का कहना है कि मानगो अक्षेस कुत्तों के आगे घुटने टेक चुका है। रंजीत घोष का कहना है कि रात में कोई रिश्तेदार हमारे घर आना ही नहीं चाहता है क्योंकि कुत्तों के काटने का डर रहता है। कुछ ऐसा ही बयान अवतार सिंह और सोना देवी का भी है। उनका कहना है कि आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए एक अलग विभाग होना चाहिए, ताकि लोगों को इस परेशानी से छुटकारा दिलाया जा सके।