
साहिबगंज। पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र इस वर्ष के विधानसभा चुनाव में चौंकाने वाला परिणाम दे सकता है। वैसे जनता का फैसला किसके पक्ष में जाएगा, उँट किस करवट बैेगा यह बता पाने में ज्योतिष एवं राजनीतिक विश्र£ेषक भी तैयार नहीं है। पर तेजी से बनते बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों से तो ऐसा ही लगता है कि इस चुनाव में मुद्दों को छोड़ जातीय समीकरण में ही मतदाता उलझे हुए है। वर्तमान में जो दृश्य बन रहा है वह अंतिम समय तक बना रहेगा या नहीं यह कहा नहीं जा सकता है। वैसे तो झामुमो ने इस बार अल्पसंख्यक मतदाताओं में सेंधमारी करते हुए अकील अख्तर को झामुमो का टिकट थमा दिया है। पर कांग्रेस प्रत्याशी आलमगीर आलम की धुंआधार बैटिंग के सामने अकील अख्तर की फिरकी गेंदबाजी एवं गत चुनाव में दूसरे नम्बर पर रही भाजपा का मजबूत क्षेत्ररक्षण कितना समय तक बना रहेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। पर मुद्दा विहीन इस विस चुनाव में जातीय समीकरा हावी रहेगा एवं पाकुड़ विधानसभा का परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है। वैसे तो भाजपा भी इस बार आश्वस्त लग रही है कि वे इस बार आसानी से बाजी मार लेंगे। पर कांग्रेस एवं झामुमो भी कम आशावान नहीं है।