
भोपाल। स्कूलों की फीस और किताबों के खर्चे में एक नया खर्च और जुड़ गया है। स्कूलों ने कमाई करने का एक नया फंडा तैयार किया है। अब पुस्तक विक्रेता के यहां किताबों के साथ संबंधित स्कूल की कापियां भी लेना अभिभावकों की मजबूरी है। यह कापियां साधारण कापियों से करीब 25 से 30 प्रतिशत महंगी है।
शहर में करीब सत्तर बडे़ पुस्तक विक्रेताओं की दुकानें होने के बावजूद सीबीएसई की किताबें खरीदने के लिए एक ही पुस्तक विक्रेता की दुकान पर अभिभावकों व विद्यार्थियों की लंबी कतारें हैं। शहर के अधिकांश सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अलावा प्रायवेट पब्लिशर्स की किताबें पढ़ाई जाती है। एनसीईआरटी का संपूर्ण पाठ्यक्रम शहर के दो पुस्तक विक्रेताओं के पास ही उपलब्ध है। अन्य पुस्तक विक्रेताओं के पास सभी कक्षाओं में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए कुछ किताबें कम है।
अभिभावक व विद्यार्थी इन दुकानों से किताबें खरीदने के बाद सेट पूरा करने के लिए शहर भर की दुकानों के चक्कर काट रहे हैं। सीबीएसई स्कूल खुलने के तीन दिन बाद भी विद्यार्थियों को अभी किताबें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
केवल दो ही जगह किताबों को बेचे जाने के कारण अभिभावकों को न केवल घंटों धूप में लाइन में लगना पड़ रहा है। कई अभिभावक तो आफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर किताबें खरीदने दुकान पर कई चक्कर लगा रहे है। अभिभावकों में इस बात को लेकर काफी रोष है। उनका कहना है, कि स्कूल प्रशासन थोड़ा सा मुनाफा कमाने के लिए यह नहीं सोचता कि इससे हम लोगों को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय स्कूल नंबर एक के प्राचार्य सुनील श्रीवास्तव कहते हैं कि एनसीईआरटी की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत ही नहीं है। शहर की अधिकांश पुस्तक विक्रेताओं के पास किताबें उपलब्ध है। इन पुस्तक विक्रेताओं से अभिभावकों को जो किताबें नहीं मिल रही हैं। उस विषय के शुरू के एक-दो चेप्टर एनसीईआरटी की वेबसाइट से डाउन लोड कर सकते है। इससे कुछ समय के लिए किताबों की कमी पूरी हो जाएगी। बाद में बाजार में किताबें उपलब्ध होने पर उसे खरीद सकते हैं।