
खंडवा। ओंकारेश्वर परियोजना के बांध में हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के निर्णय के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में किए जाने की मांग की गई थी। इस मांग को खारिज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। शनिवार को कोर्ट ने यह आंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ही पुनर्वास की समीक्षा कर डूब का निर्णय लेगा। नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल एवं चित्तरूपा पालित ने बताया ओंकारेश्वर परियोजना के संदर्भ में प्रदेश सरकार की अपील में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आंतरिम आदेश कल जारी यह कहा कि विस्थापितों की समस्याओं के संबंध में शिकायत निवारण प्राधिकरण अपनी रपट उच्च न्यायालय में ही प्रस्तुत करेगी एवं उसके बाद वही पुर्नवास की स्थिति की समीक्षा के बाद पानी आगे भरने के विषय में फैसला लेगा। आदेश के परिणाम स्वरूप शिकायत निवारण प्राधिकरण अब यह जांच करेगा कि किसानों के सभी व्यस्क पुत्रों एवं अतिक्रमणकारियों तथा जिन सैकड़ों खातेदारों ने नकद मुआवजा नहीं लिया है उन्हें प्रदेश सरकार उच्च न्यायालय के फरवरी के आदेश तथा पुनर्वास नीति के अनुसार जमीन के बदले जमीन दी है कि नहीं। साथ ही प्रभावितों द्वारा घर, प्लाट, पुनर्वास अनुदान आदि पुनर्वास नीति के विभिन्न अधिकारों से वंचित रखे जाने के संदर्भ में दायर की गई लगभग 23 सौ शिकायतों की जांच करके प्राधिकरण उच्च न्यायालय में 14 जून को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। उच्च न्यायालय 17 जून को इस रिपोर्ट पर विचार कर एवं पुनर्वास के विषय में संपूर्ण समीक्षा कर आगे की डूब के बारे में कोई निर्णय ले सकेगा। इस अपील पर सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन एवं न्यायाधीश आरवी रविचंद्रन एवं मुकुंदकम शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की। एनबीए की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता डा. राजीव धवन एवं संजय पारिख ने एवं एनएचडीसी की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे एवं रविशंकर प्रसाद ने पैरवी की।