
खंडवा। पर्यावरण को दृढ़ करने के लिए जरूरत होती है अच्छी जमीन की और एक इंच जमीन को बनने में तीन सौ सालों का समय लगता है। इसके बावजूद देश में बड़े उद्योगपति, व्यापारी, और नेता टैक्स बचाने के लिए सिंचित जमीन खरीद कर उसे पड़त बना देते हैं, जिससे देश में सिंचाई भूमि की कमी होती जा रही है और यही स्थिति बनी रही तो एक दिन देश में हर प्रकार का खाद्यान्न आयत करने की नौबत आ जाएगी। जमीन बचाने के लिए अन्य देशों की तरह देश में भी लैंड यूज पालिसी बनना चाहिए। देश में किसानों को शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए कई मालदार लोगों द्वारा खेती लायक जमीन खरीद कर खुद को अनुपस्थित कृषक की श्रेणी में ला खड़ा करते हैं। इस जमीन पर वे खेती नहीं करते जिससे वह भूमि पड़त होकर बंजर हो जाती है। देश में इस प्रकार खेती लायक जमीनों के उपयोग को रोकने के लिए एक कानून या नीति की जरूरत है। जमीन के दुरुपयोग के मामले में राजनीतिक हस्तियां, उद्योगपति, व्यापारी और अधिकारी ज्यादा शामिल होते हैं। कृषि महाविद्यालय खंडवा के डीन डॉ. आरए शर्मा जिन्होंने घटती जमीन को लेकर काफी काम किया है कहते हैं शहरों का दायरा बढ़ने से इसके आसपास की खेती लायक जमीनों पर आज कॉलोनियों का निर्माण हो रहा है। शहर में हर तरफ सीमेंटीकृत मार्गाें का निर्माण हो रहा है जो पानी को जमीन में नहीं पहुंचने दे रहे हैं। देश में कृषि भूमि बचाने के लिए वे भूमि के उपयोग की नीति बनाए जाने के पक्ष में हैं। उनके अनुसार इसके लिए एक आयोग बनाया जा सकता है जो कृषि भूमि के उपयोग के नियमों को सख्ती के साथ लागू करवा सके। पिछले दिनों खंडवा में आई बाढ़ को कुएं, बावड़ी और तालाबों का विलुप्त होना मानते हैं। डॉ. शर्मा के मुताबिक इस समय देश में एक हजार 430 लाख हैक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। देश में बढ़ रही जनसंख्या एवं घटती कृषि भूमि को लेकर किए अध्ययन में जो स्थिति सामने आई उसका एक खाका तैयार किया है। उसके अनुसार मिल रहा वर्षा जल 4 हजार लाख हैक्टयर मीटर एवं वर्ष 2007-08 में देश में 2200 लाख खाद्यान्न का उत्पादन हुआ है। आज देश की जनसंख्या 113 करोड़ है 2025 में यही संख्या 135 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी तब कम हो रही कृषि भूमि और बढ़ रही जनसंख्या के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो जाएगा। डॉ. शर्मा के अनुसार 2050 में देश में जन्म एवं मृत्यु दर समान हो जाएगी तब स्थिरता की बात की जा सकती है, लेकिन इस दौरान तक देश की जनसंख्या करीब पौने चार अरब हो जाएगी।