
भोपाल। मध्यप्रदेश में कन्यादान योजना के तहत विवाह अनुदान लेने वाली युवतियों की कौमार्य जांच के साथ-साथ गर्भ परीक्षण से नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा भ्रष्टाचार रोकने के लिए करना जरूरी था। दूसरी ओर इस जांच-पड़ताल को नारी जाति का मजाक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजने का निर्णय लिया है।
राज्य के शहडोल जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत बीते 30 जून को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में विवाह से पहले कन्याओं को कौमार्य जांचा गया। इसी के साथ गर्भ परीक्षण भी हुआ। इस मसले के तूल पकड़ने पर राज्य सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसी तमाम योजनाओं में दलाल नवविवाहित कन्याओं को शामिल कराकर सरकारी रकम लूटने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में सरकार ने सावधानी बरतने के लिहाज से यह कदम उठाया। सरकार ने कौमार्य जांच कराने को गलत कदम मानने से इंकार कर दिया।
उधर इस विषय पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर कन्याओं के कौमार्य एवं गर्भ परीक्षण कराना मानवाधिकारों के हनन के साथ ही समूची नारी जाति का घोर अपमान है। उन्होने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह अपनी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार निगरानी के जरिये रोके और नारी की गरिमा की रक्षा करे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र भी लिख रहे हैं।