
इंदौर। विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता आचार्य धर्मेद्र ने अंतर्विरोधों से उबरने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी से कहा है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा अपनाये और उसकी महत्वाकांक्षाओं को महत्व दे। उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी कि संघ के बिना भाजपा का कोई वजूद नहीं, उसने संघ के निर्देश न माने तो वह रेत के महल की तरह ढह जायेगी। उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को 20वीं सदी का सबसे बड़ा सांप्रदायिक प्रेत करार देते हुए कहा कि उनको सराहने वाला व्यक्ति कभी सराहना का पात्र नहीं हो सकता।
आचार्य धर्मेद्र आज इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। राम मंदिर मुद्दे के एक सवाल पर विहिप नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'हम तो चाहते हैं कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव राहुल गांधी हिंदू समुदाय की भावनाओं के मुताबिक राम मंदिर का शिलान्यास करने का श्रेय लें।' आचार्य धर्मेद्र ने देश में रावण की पूजा और उसके कुछ गुणों की प्रशंसा करने वालों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 'रावण की उपासना बौद्धिक दिवालियापन है।'
आचार्य धर्मेद्र ने कहा कि जिन्ना 20वीं शताब्दी के सबसे बड़े सांप्रदायिक प्रेत हैं, यह बात झूठ साबित नहीं की जा सकती। देश के विभाजन के लिए वही जिम्मेदार थे। उन्होंने दावा किया कि मुल्क के बंटवारे के विरोधी महात्मा गांधी ने जिन्ना को स्वतंत्र भारत का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने के लिए राजी करने की कोशिश तक की थी। लेकिन जिन्ना उनकी बातों की उपेक्षा करते गये। धर्मेद्र ने भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के पाकिस्तान दौरे में जिन्ना की मजार पर जाने को बहुत बड़ी भूल बताया। उन्होंने जिन्ना पर किताब लिखने वाले भाजपा से निष्कासित नेता जसवंत सिंह की उनके कथित 'जिन्ना प्रेम' को लेकर कड़वे शब्दों में आलोचना की।