

भुवनेश्वर। बस हड़ताल को गैरकानूनी बताते हुए हड़ताल में शामिल बस मालिकों के विरुद्ध राज्य सरकार ने अत्यावश्यक सेवा कानून-एस्मा लागू कर दिया है। इसके तहत मंगलवार को नौ बसों को जब्त कर लिया गया और चार बस मालिकों को गिरफ्तार कर कोर्ट चालान किया गया। कोर्ट चालान किये गए बस मालिकों में अक्षय कुमार खुण्टिया, जजाति कर, एसके सलालुद्दीन व जितेन्द्र कुमार सेनापति शामिल है। इसी के साथ राज्य सरकार ने बस मालिकों की धरपकड़ तेज कर दिया है। जगह-जगह पर छापेमारी की जा रही है।
इस बीच उड़ीसा निजी बस मालिक संघ के अध्यक्ष देवाशीष नायक ने कहा है कि सरकार एस्मा लागू कर हम पर जोर-जबरदस्ती कर रही है मगर जो कुछ भी हो हम टैक्स के बारे में सरकार द्वारा निर्णय न लिए जाने तक हड़ताल जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि गृह विभाग की ओर से एस्मा लागू करने के बारे में प्रकाशित विज्ञप्ति में दर्शाया गया है कि अगर हड़ताल से बस मालिक नहीं हटते है तो उन्हे गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है और उन पर 500 रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। संपृक्त मालिकों को एक साल तक जेल एवं 1000 रुपये तक जुर्माना भी वसूला जा सकता है। भारतीय दण्ड विधान के अनुसार सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस कर्मचारी बगैर किसी वारंट के हड़ताल में शामिल बस मालिकों को गिरफ्तार कर सकते है। संपृक्त कानून छह महीने तक जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार इसे और अधिक छह महीने तक बढ़ा सकती है। इस बारे में गृह विभाग की ओर से प्रकाशित विज्ञप्ति में कही गयी है कि बस मालिक संघ टोल फीस लागू के प्रतिवाद कर एक अक्टूबर से हड़ताल पर है। जनसाधारण के हित को देखते हुए संपृक्त हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करना आवश्यक हो गया है।
राज्य सरकार उड़ीसा अत्यावश्यक सेवा कानून 1988 की उप धारा 1 में सेक्शन-3 के अनुसार हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करने के साथ विज्ञप्ति प्रकाशित होने के छह महीने तक यह एस्मा लागू रहेगा।