
जयपुर, जागरण संवाद केंद्र : प्रदेश के 46 स्थानीय निकायों में चुनाव को लेकर चल रहा प्रचार का शोर शनिवार शाम पांच बजे थम गया। इस दौरान प्रत्याशी माइक व रैलियों के बजाय घर-घर जाकर जनसंपर्क कर अपना प्रचार कर किया। राज्य चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि प्रचार समाप्ति के बाद माइक या रैलियों के जरिए प्रचार किया गया, तो आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की जाएगी। 23 नवंबर को 46 स्थानीय निकायों में मतदान होगा, जिसमें 6430 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें चार निकायों में अध्यक्ष पद के लिए 270 तथा 1593 वार्डो के लिए 6160 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं। 19 वार्डो के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। मतदान के दिन केंद्र राज्य व निजी संस्थानों में सवैतनिक अवकाश रहेगा। मतगणना 26 नवंबर को सुबह आठ बजे से होगी।
इधर, जयपुर के इतिहास में नगर निगम और महापौर के लिए पहली बार हो रहे जबर्दस्त मुकाबले में कांग्रेस और भाजपा ने सारी ताकत झोंक दी है। गत तीन चुनावों के विपरीत पहली बार कांग्रेस बराबरी की टक्कर दे रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के गढ़ों में भारी भितरघात है लेकिन भाजपा को इसका नुकसान ज्यादा उठाना पड़ रहा है। पहली बार संघ विचारधारा के कार्यकर्ता आधा दर्जन वार्डो में भाजपा प्रत्याशियों की खुलकर खिलाफत कर रहे हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जब कांग्रेस-भाजपा मूल के कार्यकर्ता मिलकर अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ एक हो गए हैं। विधायकों के प्रभाव से हुए टिकट वितरण के खिलाफ जयपुर के डेढ़ दर्जन वार्डो में विद्रोह के हालात हैं। घनश्याम तिवाड़ी, बृजकिशोर शर्मा, नरपत सिंह राजवी, कालीचरण सराफ जैसे प्रभावशाली नेताओं के क्षेत्रों में सर्वाधिक विरोध हो रहा है। इससे निर्दलियों की स्थिति मजबूत हो रही है। ऐसे में त्रिशंक बोर्ड बनने तक की आशंका बलवती हो रही है। हालात ये हैं कि मुस्लिम मतदान और उनकी एकजुटता पर ही महापौर की कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल की जीत संभव हैं, वे अल्पसंख्यक अभी तक पूरे मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। दूसरी और भाजपा में चल रहे यादवी संघर्ष के कारण सुमन शर्मा को महापौर बनाने का मुद्दा भी तक पूरी तरह परवान नहीं चढ़ा है। कांग्रेस की जीत में सबसे बड़ी बाधा किशनपोल और हवामहल क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव जैसे माहौल का नहीं होना है, वहीं, सांगानेर के वार्डो में भाजपा प्रत्याशियों की खिलाफत है लेकिन महापौर के लिए वह विरोध नहीं है। मालवीय नगर क्षेत्र सुमन शर्मा के लिए विशेष तौर पर एकजुट नजर आ रहा है। विद्याधर नगर की भितरघात भी महापौर के लिए नहीं है। शेष विधानसभा क्षेत्रों में पहले जैसे हालात हैं।