

शामली (मुजफ्फरनगर)। पिछले दिनों चले घटनाक्रम के बाद भारतीय किसान यूनियन की 'राजधानी' बन चुकी सिसौली में किसानों की आवाजाही तेज हो गयी है। भाकियू सुप्रीमो महेंद्र सिंह टिकैत आने वाले किसानों के सत्कार में जुटे हैं। साथ ही घर से लेकर खेत तक और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के माहौल पर उनकी नजर है। दैनिक जागरण की टीम शुक्रवार को सिसौली पहुंची तो टिकैत भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ गन्ने के रस से बनी खीर का स्वाद चख रहे थे। इस दौरान टिकैत से कुछ इस तरह बातचीत हुई:-
आपको प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती पर की गई टिप्पणी का कोई अफसोस है?
टिकैत : मामूली सी बात तूल पकड़ गई। अब मामला निपट गया है, इसलिये उन्हें कोई अफसोस नहीं है। उनका इरादा प्रदेश की सीएम का दिल दुखाने का नहीं था।
सिसौली में तीन दिन तक खूनी संग्राम का जो माहौल रहा, उसके लिये कौन दोषी है?
टिकैत : किसान कानून का विरोध नहीं कर रहे थे। विरोध तो गिरफ्तारी के तरीके का किया जा रहा था। जिस तरह पुलिस मनमानी पर उतर आई थी, वह समझ से परे था। दोषी कौन है? इस बात को तो सभी जानते हैं, मेरे बताने से क्या होगा।
पहले आप गिरफ्तारी नहीं देने की बात कह रहे थे, बाद में गिरफ्तारी दे दी। क्या किसी तरह का दबाव आपके ऊपर बनाया गया था?
टिकैत : दबाव में नहीं, कानून के सम्मान में अदालत गये। किसानों की जान बचाने के लिए अदालत गये। भाकियू पर या उन पर कोई दबाव नहीं था। हम हमेशा से कानून का सम्मान करते रहे हैं।
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और सपा के मुखिया मुलायम सिंह के साथ मिलकर क्या किसी तरह के गठजोड़ का इरादा है?
टिकैत : भाकियू तो सभी दलों का सम्मान करती है। गठजोड़ के कयास मीडिया ने उठाए हैं। भाकियू वही करेगी, जो किसान की भलाई के लिए होगा। किसानों का फैसला किसानों से पूछकर ही किया जायेगा, फिलहाल इस तरह का कोई इरादा नहीं है।
प्रदेश सरकार से क्या चाहते हैं?
टिकैत : प्रदेश के किसान की हालत बुरी है। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिये। बुंदेलखंड के किसानों की हालत चिंता पैदा करती है। किसान भोला है, सरकार को चाहिये की तमाम बातें छोड़कर किसान की बेहतरी पर ध्यान दे।