
आगरा। शहर में 100 वर्ष पुरानी राम बारात के रूट में परिवर्तन के फैसले से पैदा हुआ विवाद गर्माता जा रहा है। जिस रूट पर कैंची चली है, वहां के लोगों ने फैसले पर भारी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह उचित नहीं हुआ है। कमेटी को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए। उधर राम की नगरी में विवाद हो तो जगत जननी सीता की जनकपुरी कैसे अछूती रह सकती है। कमला नगर में लगातार कुछ व्यक्तियों के हाथों उत्सव की कमान सौंपे जाने को लेकर एक गुट ने विद्रोह कर दिया है। यही नहीं समानांतर जनकपुरी समिति गठित कर दी गयी है।
रामलीला कमेटी ने इस बार रामबारात के रूट कट का फैसला लिया था। इससे फुलंट्टी, सेव का बाजार, किनारी बाजार आदि क्षेत्रों में बारात नहीं जा सकेगी। यहां के निवासियों और बाजार कमेटियों का कहना है कि यह उनकी भावनाओं से खिलवाड़ है। मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अचल कुमार शर्मा ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि वे पुराने रूट को यथावत रखें। अपने आवास पर श्री शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि राम बारात से पूरे शहर का भावनात्मक लगाव है। सौ वर्षों से इसी मार्ग से राम बारात निकलती रही है। अत: इसके रूट में किसी तरह की छेड़छाड़ उचित नहीं है। निर्णय से क्षेत्रीय नागरिकों को तकलीफ हुई है। उन्होंने कहा कि यह कोई नहीं चाहता कि राम के स्वरूपों को कोई परेशानी हो। यदि बैंड वालों से कोई दिक्कत है तो इसके लिए कमेटी के लोगों को उनसे समन्वय स्थापित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीपी ऑयल मिल पर बारात को ढाई घंटे रोका जाता है, उसके समय में कटौती कर दी जानी चाहिए। बारात सही समय पर निकले, इसके लिए हर क्षेत्रीय निवासी सहयोग को तैयार है। उन्होंने कहा कि कमेटी को कोई भी निर्णय करने से पहले क्षेत्रीय लोगों की राय भी लेनी चाहिए थी।