
इलाहाबाद । पावर कारपोरेशन का ट्रांसमिशन विभाग प्रदेश की बिजली व्यवस्था में सुधार लाने के लिए 201 बड़े उपकेंद्र बनाने जा रहा है। ये उपकेंद्र 765 केवी से लेकर 132 केवी क्षमता तक के होंगे। 11 वीं पंचवर्षीय योजना में प्रदेश में पहली बार 765 केवी क्षमता के चार सबस्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इसी प्रकार 400 केवी के 15, 220 केवी के 52 तथा 132 केवी के 130 सबस्टेशन बनाए जाएंगे। सभी सबस्टेशनों का निर्माण 2012 तक कर देना होगा। इसके बाद प्रदेश में बड़े सबस्टेशनों की संख्या 282 से बढ़कर 483 हो जाएगी।
सबस्टेशनों को जोड़ने के लिए 15 हजार 900 सर्किट किमी लाइनें भी बनाई जाएंगी। वर्तमान में 282 सबस्टेशन 22 हजार 320 सर्किट किमी लाइन से जुड़े हैं। प्रस्तावित लाइनों में 765 केवी सबस्टेशनों के लिए 2715 सर्किट किमी, 400 केवी के लिए चार हजार 189, 220 केवी के लिए चार हजार 493 तथा 132 केवी सबस्टेशनों के लिए चार हजार 472 सर्किट किमी नई लाइन बनाई जाएगी। बिजनेस प्लान के तहत 11 वीं पंच वर्षीय योजना में 2012 तक होने वाले कार्यो पर बीस हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
पावर कारपोरेशन ट्रांसमिशन के एक अधिकारी ने बताया कि सबस्टेशन बढ़ने से कार्यो का भार भी बढ़ेगा। इसीलिए पारेषण में चार की जगह आठ जोन बनाने का भी निर्णय लिया गया है। नई योजना में पूरब, पश्चिम, दक्षिण और मध्य जोन को दो-दो भागों में बांटा जाएगा। पूर्वी जोन को इलाहाबाद और वाराणसी, पश्चिम में मेरठ-नोएडा, दक्षिण में आगरा-कानपुर तथा मध्य जोन को लखनऊ वन व टू भागों में बांटा जाएगा।
चार से आठ जोन बनने पर अधिकारियों और अभियंताओं की संख्या भी बढ़ेगी। अगले चार साल के भीतर विभाग में चार मुख्य अभियंता , 23 अधीक्षण अभियंता 80 अधिशासी अभियंता, 173 सहायक अभियंता तथा 320 अवर अभियंताओं की बढ़ोत्तरी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पारेषण का विस्तारीकरण होने के बाद विभाग को बिजली के कर्मचारी खर्च भी कम होगा। कहा जा रहा है कि वर्तमान 16 पैसे प्रति यूनिट बिजली का व्हीलिंग चार्ज लेकर विभाग को चार पैसे कर्मचारियों पर व्यय करना पड़ता है। नई व्यवस्था में 3.8 पैसा प्रति कर्मचारी खर्च होगा।