
अलीगढ़। एक ही प्लॉट का सौदा दो लोगों से करने और एक से इकरारनामा व दूसरे को बैनामा करने के अलावा उसी पर पांच लाख रुपये का लोन लेने के कथित मामले में एएमयू में विधि विभाग के लेक्चरर अब मुसीबत में फंस गए हैं। दोनों खरीदारों को कई साल से चकमा दे रहे लेक्चरर शनिवार को पीड़ितों के हाथ लगे तो उन्हें सिविल लाइंस पुलिस के हवाले कर दिया गया। प्लॉट का सौदा कर फंसे दोनों व्यक्तियों ने सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने जांच होने तक गिरफ्तारी न करने की बात कही है।
बन्नादेवी थाना क्षेत्र के प्रतिभा कालोनी, हाल निवासी गंगानगर कालोनी के जसवीर सिंह के अनुसार एएमयू में विधि विभाग के लेक्चरर इकबाल हादी के पिता नवी हादी से 14 नवंबर 2000 को दो सौ वर्ग गज के प्लॉट का इकरारनामा एक लाख रुपये में कराया था। कुछ समय बाद वह प्लॉट पर गए तो देखा कि उसपर मकान बना हआ है। जानकारी करने पर पता चला कि लेक्चरर ने इकबाल हादी ने इस प्लाट पर एलआईसी से लोन भी ले रखा है और प्लॉट को बदरबाग निवासी जायद जावेद अख्तर की पत्नी आरिफा नुजत के हाथों बेच दिया है। इकबाल हादी से इस बारे बात की तो उन्होंने उन्हें धमकाया। इकबाल हादी ने कहा कि वह लॉ के प्रोफेसर हैं, कानून के दायरे में ऐसा फंसा देंगे कि सलाखों के पीछे नजर आओगे। जसवीर सिंह ने सिविल लाइंस थाने में इस मामले की रिपोर्ट नवी हादी और इकबाल हादी के खिलाफ दर्ज कराई है।
वहीं दूसरी रिपोर्ट एएमयू में डेंटल विभाग के डा. जायद जावेद अख्तर की पत्नी आरिफा नुजत ने भी लेक्चरर इकबाल हादी के खिलाफ दर्ज कराई है। रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि लेक्चरर इकबाल हादी से उन्होंने 1 अक्टूबर 2002 को दो लाख रुपये में प्लाट खरीदा था। जब वह प्लॉट पर निर्माण कराने जा रही थीं तभी भारतीय जीवन बीमा निगम आगरा से कुछ लोग आए और उन्होंने निर्माणकार्य रुकवाने के लिए कहा। पूछताछ में पता चला कि इकबाल हादी ने प्लॉट पर पांच लाख रुपये का लोन ले रखा है। इकबाल हादी से इस बारे में संपर्क किया तो उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ समय बाद वह लोन अदा कर देंगे, परंतु आज तक लोन अदा नहीं किया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। लेक्चरर को गिरफ्तार नहीं किया गया है।